प्रदेश में जारी सियासी संकट के बीच अब भाजपा और कांग्रेस के बीच नई आबकारी नीति को लेकर जंग छिड़ गई है। आबकारी नीति की आड़ में दोनों एक-दूसरे पर वित्तीय भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाकर जांच की मांग कर रहे हैं।
शासन की ओर से आबकारी नीति एफएल-टू में किए गए बदलावों को राज्य के लिए लाभकारी बताते हुए भाजपा प्रदेश प्रवक्ता मुन्ना सिंह चौहान ने कहा है कि कांग्रेस सरकार की ओर से लागू की एफएल-टू आबकारी नीति को लेकर गंभीर आपत्तियां शुरू से ही थीं।
तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आला अफसरों की सलाह को दरकिनार कर लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के बावजूद एफ एल-टू नीति को लागू कर दिया था। ताकि शराब माफियाओं को अपरोक्ष लाभ पहुंचाकर मोटी कमाई की जा सके।
शराब कारोबारियों को अपरोक्ष रूप से पहुंचाया गया लाभ
प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि सरकार ने हवेलिया और क्षेत्री नाम के दो शराब कारोबारियों को अपरोक्ष रूप से लाभ पहुंचाया। इन दोनों शराब कारोबारियों के साथ ही एफएल टू की आड़ में मोटी कमाई करने वाले नेताओं, अफसरों की संपत्तियों की जांच की मांग की।
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा के शासनकाल में भ्रष्टाचार से जुड़े 56 मामलों की जांच कराई गई थी, जिसमें से 28 मामलों को कार्रवाई के लिए विजिलेंस को भेजा गया था, लेकिन बाद में सरकार बदल जाने से यह मामला भी गर्त में चला गया। कहा कि भाजपा भ्रष्टाचार से जुड़ी किसी भी प्रकार की जांच कराने को तैयार है।
शराब कंपनियों एकाधिकार होगा समाप्त
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्टिंग आपरेशन की जांच की मांग उठाते हुए प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि उन्होंने इस प्रकरण से जुड़ी खबरों को रोकने के लिए क्या कुछ नहीं किया।
आबकारी नीति में किए गए बदलाव के लिए राज्यपाल को धन्यवाद देते हुए प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि नीति में बदलाव किए जाने से जहां राजस्व वसूली के लक्ष्यों को हासिल किया जा सकेगा, वहीं कतिपय शराब कंपनियों का भी एकाधिकार समाप्त होगा।