बचाव अभियान में जुटे जवानों को केदारनाथ और गौरीकुंड के बीच फंसे करीब 1000 और लोगों का पता चला है।
बाढ़ आने के वक्त जान बचाने के लिए इन लोगों ने रामबाड़ा और जंगलचट्टी इलाकों में गुफाओं और अन्य सुरक्षित जगहों पर शरण ले ली थी।
इन लोगों को हेलीकॉप्टर के जरिए अब गौचर राहत शिविर में ले जाया जा रहा है। कई दिनों से भूख और ठंड के चलते इनमें से कई की हालत खराब है।
73 हजार लोगों को अब तक बचाया गया
10000 लोग शनिवार को ही बचाए गए
22 हजार लोग अब भी फंसे हैं
61 हेलीकॉप्टर लगे हैं बचाव अभियान में, इनमें वायुसेना के 43 और सेना के 11 भी शामिल, दुनिया का सबसे बड़ा एमआई-26 हेलीकॉप्टर भी लोगों को निकालने के काम में लगाया गया। इसमें एक बार में 150 लोग आ सकते हैं।
सोमवार को मौसम बिगड़ने से पहले बढ़ी चुनौती
उत्तराखंड में मौसम फिर खराब होने लगा है। सोमवार को फिर वहां भारी बारिश होने के आसार हैं।
ऐसे हालात बनने से पहले तमाम जगहों पर फंसे लोगों को निकालने के लिए सेना और अन्य एजेंसियों ने राहत अभियान तेज कर दिया है।
बचाव अभियान में लगे हेलीकॉप्टरों ने 220 उड़ानें की थीं। लेकिन बिगड़ते मौसम को देख फंसे लोगों को निकालने के लिए शनिवार को 500 उड़ानें की गईं।
रविवार को भी 500 उड़ानें होंगी। सेना की मध्य कमान के प्रमुख अनिल चैत ने भरोसा दिलाया कि बचाव अभियान में लगी सेना लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरेगी।
केदारनाथ से निकाले 123 शव
केदारनाथ मंदिर परिसर से 123 शव बरामद किए गए हैं। सैन्य अधिकारियों के मुताबिक इनमें से 86 शवों की पहचान कर ली गई है।
इन शवों की बरामदगी के बाद मरने वालों की आधिकारिक संख्या 680 तक पहुंच गई है। मंदिर और उसके आसपास बिखरे शवों की गिनती करने के लिए आठ सदस्यीय एक टीम भेजी गई।
इन शवों के फोटो लिए जाएंगे और फिर उन्हें सरकारी वेबसाइट पर डाला जाएगा। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा कि तबाही में मरने वालों की संख्या 1000 के करीब हो सकती है।
हालांकि सही आंकड़ा तभी पता चल सकेगा जब मलबे में दबे शव बरामद कर लिए जाएंगे।