शीतकालीन प्रवास मुखबा स्थित गंगा मंदिर की ओर प्रस्थान करती मां गंगा की डोली।
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तीर्थ पुरोहितों के गांव मुखबा में विधि विधान एवं धार्मिक अनुष्ठान के साथ मां गंगा की भोग मूर्ति को गंगा मंदिर में स्थापित किया गया। अब शीतकाल में श्रद्धालु मुखबा में ही मां गंगा के दर्शन और पूजा-अर्चना का पुण्य लाभ अर्जित कर सकेंगे।
सोमवार को गंगोत्री मंदिर के कपाट बंद होने के बाद मां गंगा की भोग मूर्ति को डोली यात्रा के साथ मार्कण्डेय स्थित देवी मंदिर पहुंचाया गया। मंगलवार को भैया दूज के पावन पर्व पर मां गंगा की डोली यात्रा देवी मंदिर से मुखबा गांव के लिए रवाना हुई। दोपहर दो बजे मुखबा पहुंचने पर डोली का भव्य स्वागत किया गया। मुखबा एवं धराली गांव के समेश्वर देवता की डोली ने मां गंगा की डोली का स्वागत किया। इस अवसर पर गांव में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन भी चल रहा है। अब तीन दिन तक यहां पांडव नृत्य का आयोजन किया जाएगा।
पुजारी सुधांशु सेमवाल ने बताया कि क्षेत्र में जियो की मोबाइल फोन सेवा शुरू होने से संचार की समस्या तो हल हुई है, लेकिन सर्दियों में सड़क, विद्युत एवं पेयजल व्यवस्था लड़खड़ाने से स्थानीय लोगों के साथ ही बाहरी क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस मौके पर मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल, सचिव दीपक सेमवाल, अरुण सेमवाल, राजेश सेमवाल, गंगा के पुजारी मुकेश सेमवाल, सुमन सेमवाल, कुलदीप सेमवाल, आशुतोष सेमवाल आदि मौजूद रहे।