जिला पंचायत की ओर से आयोजित पौराणिक माघ मेला ‘बाड़ाहाट कू थौलू’ में सोमवार को भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों से आए कलाकारों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुति देकर गढ़वाल की समृद्ध लोक संस्कृति की झलक प्रस्तुत की। रविवार रात को लोक गायिका संगीता ढौडियाल एवं बीना बोरा ने गीतों से पूरा मेला पंडाल झूम उठा।
रविवार रात को मेला मंच पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या का गंगोत्री के पूर्व विधायक विजयपाल सजवाण व पालिकाध्यक्ष रमेश सेमवाल ने मेले की शुभकामनाएं दीं। साथ ही जिला पंचायत के प्रयासों की सराहना करते हुए जनपद की समृद्ध संस्कृति व परंपराओं का संरक्षण करने की अपील की। इस बीच लोक गायिका संगीता ढौडियाल ने टीम के साथ रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
उन्होंने ‘दुर्गा वंदना’, ‘खेला पांसो’, ‘पिछने बटि सीटी न मारा’, ‘मि छौ बांद गढ़वाली’ आदि गीतों ने मेला पंडाल में मौजूद दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया, जबकि लोक गायिका बीना बोरा ने ‘रोड़ जाणु मेरी अमिये’, ‘बालि संध्या’, ‘प्यारु गढ़वाल’ आदि गीतों की मनमोहक प्रस्तुति दी। इससे पहले विभिन्न स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने भी मेला मंच पर रंगारंग प्रस्तुति दीं।
सोमवार को मेले के सातवें दिन लोक गायक ओम प्रकाश सेमवाल ने मेला मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरूआत की। उन्होंने ‘मां भगवती वंदना’, ‘नरु बिजुला दूइ भाई’, ‘हे मेरी बांद तू मानी जा’, ‘हे छोरी अनिता’ आदि गढ़वाली गीतों की प्रस्तुति देकर मेले में समा बांधा। इसके बाद सुखराज अग्निहोत्री, जमुना उनियाल, अनिल बेसारी, हर्षपाल भंडारी आदि कलाकारों ने भी गीत एवं नृत्य की प्रस्तुति दी। इस मौके पर जिला पंचायत अध्यक्ष दीपक बिजल्वाण, उपाध्यक्ष कविता परमार, सदस्य पूनम थपलियाल, जयमाला रौतेला, प्रदीप भट्ट, प्रदीप कैंतुरा, मनीष राणा, शिवरतन रावत, नागदत्त, राजाराम भट्ट आदि मौजूद रहे।
कवि सम्मेलन में दिया बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश
माघ मेला मंच पर रविवार शाम को कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें कवियों ने समसामयिक एवं महत्वपूर्ण विषयों पर आधारित संदेशपरक कविताओं व गीतों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं की खूब तालियां बटोरीं। कवि सम्मेलन में कवियत्री साधना जोशी ने बेटियों के महत्व पर आधारित कविता पेश करके ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का संदेश दिया, जबकि राजाराम भट्ट ने गढ़वाल की प्राकृतिक सुंदरता और प्रदीप नेगी ने वीर जवानों की शहादत पर आधारित कविताएं पेश कर वाहवाही लूटी। कवि सम्मेलन में नागदत्त, शिवरतन रावत, डॉ. रामचंद्र उनियाल आदि कवियों ने भी रचनाएं प्रस्तुत कीं।