उत्तराखंड के प्रथम दो तीर्थ गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिर के कपाट अक्षय तृतीया के पर्व पर शुक्रवार को आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। सैकड़ों श्रद्धालु कपाटोद्घाटन के साक्षी बने। राज्य के दो अन्य प्रमुख धामों श्री केदारनाथ के कपाट तीन मई और बदरीनाथ के पट छह मई को खुलेंगे।
मां यमुना जी की भोगमूर्ति डोली यात्रा शीतकालीन प्रवास खरसाली से प्रात: 9 बजकर 15 मिनट पर यमुनोत्री के लिए रवाना हुई। यमुना जी के भाई शनि महाराज की डोली भी यमुनोत्री तक गई। तय मुहूर्त में 12 बजकर 15 मिनट पर वैदिक मंत्रोच्चार और अनुष्ठान के साथ यमुनोत्री मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।
यमुनोत्री मंदिर समिति के उपाध्यक्ष पवन प्रकाश उनियाल ने बताया कि पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के कुछ विलंब से पहुंचने के कारण मां यमुना की अभिषेक आरती 12 बजकर 25 मिनट पर संपन्न हुई। पूर्व मंत्री अमृता रावत, पूर्व विधायक मोहन सिंह रावत गांववासी, विधायक यमुनोत्री केदार सिंह रावत एवं धनोल्टी के पूर्व विधायक महावीर सिंह रांगड़ आदि भी मौजूद थे।
उधर, मुखबा से मां गंगा जी की डोली बृहस्पतिवार को रवाना होकर रात में भैरोंघाटी स्थित भैरव मंदिर में पहुंची थी, जहां से डोली यात्रा शुक्रवार सुबह 9 बजकर 20 मिनट पर गंगोत्रीधाम पहुंची। यहां विशेष पूजा-अर्चना गंगा सहस्त्रनाम पाठ के साथ तय मुुहूर्त में दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर गंगोत्री धाम के कपाट खोल दिए गए।
इस मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री व सांसद रमेश पोखरियाल निशंक, गंगोत्री विधायक गोपाल रावत, भाजपा के जिलाध्यक्ष रामसुंदर नौटियाल, गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष मुकेश सेमवाल, सचिव सुरेश सेमवाल, डीएम उत्तरकाशी डा. आशीष कुमार श्रीवास्तव, एसपी ददन पाल, बीआरटीएफ 36 के कमांडर एससी लूनिया आदि मौजूद थे।