कपाटोद्घाटन और शुरूआती यात्रा सीजन में इस बार भी गंगोत्री धाम जनरेटरों के शोर से अशांत रहेगा। धाम को रोशन करने के लिए रुद्रगैरा पर बनी डेढ़ सौ किलोवाट की लघु जल विद्युत परियोजना चालू नहीं हो पाई है। इस बार सर्दियों में कम बर्फबारी के चलते कार्य कराने की अनुकूल स्थिति के बावजूद उरेडा की ओर से समय पर परियोजना तैयार नहीं कराने पर भी सवाल उठ रहे हैं।
गंगोत्री धाम को रोशन करने के लिए रुद्रगैरा पर सौ किलोवाट की लघु जल विद्युत परियोजना बनी है। दो साल पहले इसकी क्षमता बढ़ाने के लिए 50 किलोवाट की एक नई टरबाइन लगाई गई थी।
दोनों पुरानी टरबाइनें पूर्व में डिसिल्टिंग चैंबर नहीं होने के कारण विद्युत गृह में रेत बजरी पहुंचने से बेकार हो गई। एक टरबाइन का जनरेटर फुंका पड़ा है। पावर चैनल का करीब तीस मीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त है। फोर वे टैंक की ऊंचाई तो बढ़ाई गई, लेकिन इसकी दीवारें क्षतिग्रस्त हैं।
पाइप जाड़ों में पानी चलते रहने के कारण फट गए हैं। पावर हाउस में कंक्रीट बेस तोड़कर नए ड्राफ्ट ट्यूब गेट को फिट करना होगा। वैकल्पिक इंतजाम के तौर पर उरेडा ने यहां सौ किलोवाट का एक डीजल जनरेटर रखा है, लेकिन यह कभी पूरे समय नहीं चल पाया।
25 किलोवाट की केदारगंगा लघु जल विद्युत परियोजना डिजाइन की कमी के चलते बीस किलोवाट उत्पादन ही कर पाती है और यह भी पेनस्टोक पाइप फटे होने के कारण बंद पड़ी है। एनटीपीसी ने गंगोत्री मंदिर के लिए 50 किलोवाट का एक जनरेटर लगाया था, पर यह भी कई सालों से खराब पड़ा है। ऐसे में तय है कि कपाटोद्घाटन और शुरूआती यात्रा सीजन में गंगोत्री धाम में जनरेटरों का शोर रहेगा।
टरबाइन बनाने वाली देहरादून की एक कंपनी से टरबाइन और ड्राफ्ट ट्यूब गेट खरीद कर इसी कंपनी को इसे विद्युत गृह में लगाने का काम दिया है। पावर चैनल की मरम्मत का काम शुरू हो गया है। शीघ्र टरबाइनें गंगोत्री पहुंचाकर नौ मई को गंगोत्री मंदिर के कपाट खुलने से पहले परियोजना से विद्युत उत्पादन शुरू कर लिया जाएगा।
मनोज कुमार, परियोजना अधिकारी, उरेडा उत्तरकाशी।