बड़कोट। यमुनोत्री धाम मेें पैदल यात्रा रूट पर करीब चार हजार मजदूर और तीन हजार घोड़ा-खच्चर संचालक हर वर्ष जिला पंचायत को करोड़ों का राजस्व देते हैं। लेकिन उनके लिए अभी तक वहां पर उचित व्यवस्था नहीं की गई है। यमुनोत्री धाम में बने घोड़ा पड़ाव में स्थान की कमी है। साथ ही मजूदरों के लिए रहने के लिए बने कमरों में सुविधाएं नहीं है। इसलिए उन्हें दिन भर खुले आसमान के नीचे खड़े रहने को मजबूर होना पड़ता है।
यमुनोत्री की यात्रा पर लगे हजारों मजदूरों और बेजुबानों की ओर से अपनी पीठ व कंधों पर श्रद्धालुओं को ढो कर करीब ढाई तीन करोड़ रुपए का राजस्व सरकार को देते हैं। लेकिन उनके लिए पर्याप्त और सुरक्षित ठौर ठिकाना नहीं है। यमुनोत्री धाम की जानकीचट्टी से यमुनोत्री करीब 6 किमी पैदल यात्रा का संचालन जिला पंचायत ठेके के माध्यम से संचालित करती है। वहां पर पंजीकृत मजदूरों और बेजुबानों के लिए धाम में इकलौता घोड़ा पड़ाव और दूसरी मंजिल में मजदूरों के लिए बनाया गया है। लेकिन उसकी स्थिति बदहाल होने के साथ ही वहां पर सुविधाएं नहीं हैं। इस कारण मजदूरों और बेजुबानों को पहाड़ी पर बैठने खड़े होकर श्रद्धालुओं का इंतजार करना पड़ता है। युवा मजदूर मंगल सिंह रावत, मोहन लाल और मजदूरों के प्रबल समर्थक महावीर सिंह पंवार का कहना है कि यमुनोत्री पैदल मार्ग पर करीब 7000 से अधिक मजदूर और घोड़े खच्चर जिला पंचायत में पंजीकृत हैं। वह अपनी मेहनत की कमाई से करोड़ों रुपए का राजस्व सरकार को देते हैं। लेकिन सुविधा के नाम पर ऊंट के मुंह से जीरे वाली कहावत चरितार्थ हैं। धूप और बारिश में जिला पंचायत को सुविधा शुल्क देने के बाद भी पर्याप्त और सुरक्षित ठिकानों का अभाव बना हुआ है।