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Uttarkashi News: गंगोत्री हाईवे पर मंडरा रहा आपदा का साया

Mon, 11 May 2026 07:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
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10 माह बाद भी अधूरा सुधारीकरण, बीआरओ की सुस्त चाल बनी मुसीबत
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नदी का जलस्तर बढ़ा तो फिर कटेगा हर्षिल और गंगोत्री घाटी का संपर्क
उत्तरकाशी। गंगोत्री हाईवे पर आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त हिस्सों का दस माह बाद भी सुधारीकरण नहीं हो पाया है। लिम्चागाड, भटवाड़ी सहित डबरानी और सोनगाड़ में बीआरओ की ओर से वैकल्पिक कार्य किए जा रहे हैं लेकिन वहां पर कार्यगति धीमी होने के कारण यह बरसात में दोबारा बड़ी मुसीबत बनेंगे। साथ ही लिम्चागाड पुल के क्षतिग्रस्त पिलर की सुरक्षा के लिए किसी प्रकार के कदम नहीं उठाए गए हैं।
बीते अगस्त में लिम्चागाड उफान पर आने के कारण गंगोत्री हाईवे का पुल बह गया था। साथ ही वहां पर करीब 300 मीटर लंबी सड़क भी क्षतिग्रस्त हो गई थी। उसके बाद वहां पर सेना और बीआरओ ने बैली ब्रिज का निर्माण कर आवाजाही शुरू करवाई। बीआरओ ने चारधाम यात्रा शुरु होते ही लिम्चागाड और भटवाड़ी में धंसी सड़क के लिए सुरक्षात्मक कार्य शुरू किए गए लेकिन वहां पर धीमी गति से हो रहा कार्य आगामी बरसात में मुसीबत बनेगा। साथ ही लिम्चागाड में बैली ब्रिज तो बना दिया गया।
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क्षतिग्रस्त पिलर की सुरक्षा के लिए कोई कार्य नहीं किया गया। डबरानी में भूस्खलन जोन और क्षतिग्रस्त सड़क पर भी सुरक्षात्मक कार्य नहीं किए गए। सोनागाड में बनाई गई मिट्टी की सड़क नदी का बहाव बढ़ते ही उसके बहने का खतरा बना है। शासन-प्रशासन और बीआरओ की ओर से अभी तक इनके दीर्घकालिक सुधारीकरण के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं।
स्थानीय निवासी दिनेश रावत, दीपक, मनोज आदि का कहना है कि ऐसी स्थिति रही तो दोबारा बरसात में सड़कें बंद होने के कारण टकनौर और हर्षिल व गंगोत्री घाटी में आपदा जैसे हालात हो जाएंगे। बीआरओ के कमांडर राजकिशोर का कहना है कि दीर्घकालिक ट्रीटमेंट के लिए टीएचडीसी की ओर से सर्वे करवाया जाएगा। फिलहाल वैकल्पिक तरीकों से हाईवे को दुरुस्त किया जाएगा।
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यातायात सुचारू रखने के लिए होमगार्ड हो तैनात
उत्तरकाशी। गंगगानी से डबरानी से करीब पांच किमी के दुर्घटना संभावित और संकरी सड़क पर पुलिस की ओर से यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए जवानों और होमगार्ड तैनात नहीं है। साथ ही लिम्चागाड में बने बैली ब्रिज पर भी आवाजाही का सुचारू रखने के लिए किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं है। वहां पर पुल और क्षतिग्रस्त सड़क होने के कारण वाहनोें की आवाजाही में सबसे अधिक परेशानी हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन स्थानों पर पुलिस और होमगार्ड जवानों की तैनाती होनी चाहिए। संवाद
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