नौगांव ब्लाक के कंसेरू गांव में ‘पलायन एक चिंतन’ विषय पर गोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें शामिल लोगों ने उत्तराखंड बनने के बाद पलायन में आई तेजी पर चिंता जताते हुए इसके लिए राज्य सरकारों को जिम्मेदार ठहराया।
गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि तरक्की करने के लिए पहले भी गांवों से पलायन होता रहा है, लेकिन अलग उत्तराखंड बनने के बाद इसमें बहुत तेजी आई है।
आज स्थिति यह है कि पहाड़ के गांव खाली होते जा रहे हैं। कहा कि बढ़ते पलायन के लिए गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क आदि मूलभूत सुविधाओं तथा आजीविका के साधनों का टोटा प्रमुख कारण है।
दिव्या रावत ने कहा कि गांवों में रोजगार के साधन तैयार कर पलायन को रोका जा सकता है। खलाड़ी पुरोला के प्रगतिशील किसान युद्धवीर सिंह रावत ने भी बागवानी के अनुभव साझा किए।
गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि ग्राम प्रधान एवं क्षेत्र पंचायत सदस्य चुनाव जीतते ही गांव छोड़ कर ब्लाक मुख्यालय, जिला पंचायत सदस्य जिला मुख्यालय, विधायक राजधानी देहरादून और सांसद दिल्ली पलायन कर लेते हैं। जब चुने हुए जनप्रतिनिधि ही पलायन कर रहे हैं, तो गांवों की समस्याएं कौन हल करेगा।
इस मौके पर एसपी अनंत शंकर ताकवाले, रतन सिंह असवाल, अनिल बहुगुणा, राजेंद्र जोशी, कमलेश गुरुरानी, अजय रावत, विजेंद्र सिंह, अजय पुरी, शांति ठाकुर, विनोद राणा आदि मौजूद रहे।