यहां जिला महिला अस्पताल तो खोल दिया गया है लेकिन गर्भवती महिलाओं का इलाज करने के लिए एक भी स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं है। डॉक्टरों की तैनाती न होने से यह केवल रेफर सेंटर बन गया है। पिछले छह महीने में यहां से 112 प्रसूताओं को देहरादून के लिए रेफर किया जा चुका है। इतना होने पर भी स्वास्थ्य विभाग महिलाओं की सेहत के लिए गंभीर नहीं है।
बता दें कि अस्पताल में स्वीकृत गायनोकोलॉजिस्ट समेत सभी छह डॉक्टरों का स्थान आज भी रिक्त है। प्रसव के लिए संविदा पर रखी गईं चार सामान्य महिला चिकित्सकों के भरोसे इलाज किया जा रहा है। इस अस्पताल पर सीमांत जनपद उत्तरकाशी के साथ ही टिहरी जिले के बांध प्रभावित प्रतापनगर क्षेत्र की जनता भी निर्भर है। यहां सीएमएस एवं सर्जन समेत चिकित्सकों के कुल छह पद सृजित हैं और सभी रिक्त हैं। फिलहाल, यह अस्पताल संविदा पर तैनात चार सामान्य महिला चिकित्सकों के भरोसे है। इनमें से भी एक स्वास्थ्य केंद्र पिपली और एक डुंडा से व्यवस्था पर यहां तैनात हैं।
गायनोकोलॉजिस्ट, सर्जन एवं एनेस्थेटिक न होने से ये चिकित्सक सिर्फ सामान्य प्रसव ही यहां करा पा रही हैं। थोड़ा गंभीर केस होने पर ही प्रसूताओं को देहरादून रेफर कर दिया जाता है। उत्तरकाशी से देहरादून की लंबी दूरी और बदहाल सड़क के चलते यह प्रसूता और उसके तीमारदारों के लिए बड़ी कठिन स्थिति होती है। ऊबड़-खाबड़ सड़क से देहरादून ले जाते हुए प्रसूता व शिशु की मौत का खतरा बना रहता है। बीते छह माह के अंदर ही यहां से 112 प्रसूताओं को प्रसव के लिए देहरादून भेजा गया। इनमें से सात नवजात शिशुओं ने पैदा होने से पहले गर्भ में ही दम तोड़ दिया।
- महिला अस्पताल और ट्रामा सेंटर में अभी तक चिकित्सक एवं संसाधनों की व्यवस्था नहीं की गई है। सरकार चिकित्सकों को पहाड़ पर तैनाती देने में नाकाम साबित हो रही है। ऐसे में छोटी-छोटी बीमारियों के उपचार के लिए लोग देहरादून की दौड़ लगानी पड़ती है।
-- गोपाल रावत, गंगोत्री क्षेत्र के पूर्व विधायक गोपाल रावत
महिला अस्पताल में चिकित्सकों के सभी छह पद रिक्त हैं। संविदा चिकित्सकों से काम चलाया जा रहा है। गायनोकोलॉजिस्ट पूरे जिले में एक भी तैनात नहीं है। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है।
- डॉ. आरपी सिंह, सीएमएस जिला अस्पताल उत्तरकाशी।