उद्यान विभाग ने बीमारी की चपेट में आई टमाटर की फसल बचाने की कसरत शुरू कर दी है। विभाग ने फंगस विल्ट बीमारी को नियंत्रित करने के लिए किसानों को पौधों की जड़ पर कार्बेंडाजिम दवा का छिड़काव करने की सलाह दी है।
जिले की गंगा एवं यमुना घाटी में टमाटर की फसल का खूब उत्पादन होता है। यहां किसान हर सीजन में लाखों रुपये की फसल का उत्पादन करते हैं। इस बार भी टमाटर की फसल लगभग तैयार हो चुकी थी। काश्तकार अब फसल को मंडियों तक पहुंचाने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन अचानक फसल बीमारी की चपेट में आ गई। अमर उजाला ने 9 जुलाई के अंक में किसानों की इस समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया। खबर प्रकाशित होने पर हरकत में आए उद्यान विभाग ने रानीचौरी प्रयोगशाला में बीमारी का परीक्षण कराया।
जिला उद्यान अधिकारी नरेंद्र यादव ने बताया कि जांच में टमाटर की फसल पर फ्यूजेरियम आक्सीपोरियम नामक फंगस का प्रकोप पाया गया। फंगस विल्ट नामक इस रोग को कार्बेंडाजिम दवा से नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने काश्तकारों को टमाटर की पौध की जड़ पर कार्बेंडाजिम का छिड़काव करने की सलाह दी। साथ ही बीमारी से प्रभावित पौधों को खोदकर नहीं निकालने तथा सिंचाई ऊंचाई से नीचे की ओर नहीं करने की सलाह दी।