सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन के लिए नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) मौजूदा अकादमिक वर्ष में ही दो चरण में करवाने का आदेश गुरुवार को दिया है। इस संयुक्त परीक्षा से मेडिकल दाखिले में आने वाली कई तरह की समस्याओं का समाधान हो जाएगा।
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इसके तहत सीबीएसई द्वारा 1 मई को करवाया जा रहा ऑल इंडिया प्री-मेडिकल टेस्ट पहला चरण यानी नीट-1 होगा। यह टेस्ट देश के 52 शहरों के 1040 केंद्रों में कराया जा रहा है।
नीट-1 में वे स्टूडेंट्स शामिल हो सकेंगे जिन्होंन मेडिकल में दाखिले के लिए राज्य स्तर पर होने वाली परीक्षा (होम एग्जाम) को छोड़ दिया था और एआईपीएमटी तैयारी कर रहे थे। दूसरी ओर नीट-2 का आयोजन बाकी विद्यार्थियों के लिए होगा। नीट-2 का आयोजन 24 जुलाई को किया जाएगा। इसके लिए प्रक्रिया सात मई से शुरू की जाएगी और परिणाम 17 अगस्त को जारी किए जाएंगे।
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सत्र 2016 के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस और बीडीएस की 3,429 सीटों के लिए करीब 6,67,637 विद्यार्थी ऑल इंडिया प्री-मेडिकल टेस्ट देने जा रहे हैं जिसे नीट-1 कहा जा रहा है। इसके तहत कुल मेडिकल सीटों की करीब 15 प्रतिशत सीटें आएंगी।
रैंकिंग में भारी अंतर हो जाएगा खत्म
एआईपीएमटी 2015 के लिए तीन चरण में काउंसलिंग की गई थी। इसमें तीसरे राउंड के बाद जो सीटें खाली रहीं, उन्हें प्रदेश के कोटे में डाल दिया गया था। इसकी वजह से एआईपीएमटी में 5 हजार तक रैंक लाने वाले परीक्षार्थियों को तो सीट नहीं मिली, पर उसी राज्य में स्टेट रैंक 35,000 लाने वाले परीक्षार्थी को सीट मिल गई। माना जा रहा है कि नीट 2017 इस तरह के अंतर को हमेशा के लिए खत्म कर देगा।
उपलब्ध होंगी 62 हजार सीटें
प्रदेश में एमबीबीएस और बीडीएस की 1,750 सीटें हैं। इनमें 100 बीडीएस की हैं। इन सीटों पर एडमिशन के साथ-साथ प्रदेश के विद्यार्थी बाकी प्रदेशों की सीटों पर भी एडमिशन का दावा ठोंक सकेंगे। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के अनुसार फिलहाल देश में मेडिकल की 52,475 सीटें हैं। वहीं केंद्र सरकार ने हाल में 10 हजार सीटें बढ़ाने की घोषणा की थी, इससे नीट 2017 के आयोजन के समय तक साढ़े 62 हजार सीटों पर एडमिशन के लिए मुकाबले में विद्यार्थी शामिल हो सकेंगे।
अलग-अलग पैटर्न और सिलेबस से निजात
नीट के आयोजन से विद्याथियों को विभिन्न राज्यों के प्री मेडिकल टेस्ट के अलग-अलग पैटर्न और सिलेबस से मुक्ति मिल जाएगी। अब विद्यार्थियों को एक ही पैटर्न और सिलेबस के हिसाब से तैयारी करनी होगी। इससे देश भर के विद्यार्थी एक साथ परीक्षा देंगे और विभिन्न राज्यों के मेडिकल कॉलेजों में रैंक के अनुसार एडमिशन ले सकेंगे।
ये होंगे बड़े फायदे
- नीट की वजह से सभी वर्गों में 15 प्रतिशत सीटों के लिए ऑल इंडिया रैंक और 85 प्रतिशत सीटों के लिए स्टेट रैंक दी जाएगी। इसके आधार पर परीक्षार्थी सभी सीटों के लिए पात्र हो जाएंगे।
- स्टूडेंट्स का मानसिक तनाव कम होगा। उन्हें राज्यों की अलग-अलग प्रवेश परीक्षाओं की जगह केवल नीट देना होगा।
- स्टूडेंट्स को विभिन्न राज्यों में परीक्षा देने के लिए जाने के झंझट से भी छुटकारा मिलेगा।
- कई प्राइवेट कॉलेज दाखिले के लिए अपनी परीक्षा करवाते हैं, उदाहरण के लिए तमिलनाडु में 80 प्रतिशत प्राइवेट कॉलेजों की अपनी प्रवेश परीक्षाएं हैं, इनमें शामिल होने के खर्च और परेशानी से भी विद्यार्थी बच सकेंगे।
- एकीकृत परीक्षा प्रणाली होने से पेपर के लीक होने जैसी घटनाओं को रोकने पर बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी।
- कुछ कॉलेजों द्वारा एडमिशन के दौरान किया जाने वाला भ्रष्टाचार भी इस संयुक्त परीक्षा के जरिए रोका जा सकेगा।
- कुछ मेडिकल यूनिवर्सिटीज ऑनलाइन टेस्ट में परसेंटाइल निकालने लगीं थीं, विद्यार्थियों को इससे भी छुटकारा मिलेगा।
इन बातों का रखना होगा ख्याल
- वे स्टूडेंट्स जो एआईपीएमटी 2016 के लिए आवेदन कर चुके हैं, वे 1 मई को होने जा रही परीक्षा में जरूर शामिल हों। यह इस वर्ष के लिए निर्धारित किया गया पहला चरण यानी नीट-1 है।
- 24 जुलाई को होने वाली नीट-2 परीक्षा के लिए वे विद्यार्थी आवेदन कर सकेंगे, जिन्होंने अभी आवेदन नहीं किया है। हालांकि इसके लिए अभी स्पष्ट निर्देश आने बाकी हैं।
- नीट 2017 ही देश भर के मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन का माध्यम बन जाएगी, कोई प्रदेश स्तरीय परीक्षा नहीं होगी, इसलिए अब इसी पर फोकस करें।
- नीट 2017 में विद्यार्थियों को ऑल इंडिया रैंक और स्टेट रैंक दोनों दी जाएंगी। यही रैंक देश के सभी मेडिकल संस्थानों के लिए मान्य होंगी।
- 17 से 25 वर्ष आयु वर्ग के युवा अगर इस वर्ष अच्छी रैंक नहीं हासिल कर पाते हैं तो वे आगे चलकर फिर से नीट में शामिल हो सकेंगे।
इससे समाज में एक बेंच मार्क सैट हो सकेगा। नीट के जरिए देशभर में डॉक्टरों की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकेगा और इसमें राष्ट्रीय स्तर पर एकरूपता आएगी।
समयबद्ध हो जाएगी पूरी प्रक्रिया : नीट से मेडिकल दाखिले की पूरी प्रक्रिया टाइम बाउंड हो जाएगी। सभी चरण नियमित हो जाएंगे। राष्ट्रीय स्तर पर किया गया यह बदलाव विद्यार्थियों के साथ-साथ मेडिकल फैकल्टी के लिए भी राहत भरा होगा।
इस पर केजीएमयू के वीसी प्रो. रविकांत का कहना है कि नीट से विद्यार्थियों से परीक्षा का तनाव कम होगा और वे बेहतर तैयारी के साथ परीक्षा दे सकेंगे। इससे सभी पक्षों को फायदा होगा। एक ओर मेडिकल दाखिलों में हो रही गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को रोकने में मदद मिलेगी, वहीं प्रवेश प्रक्रिया में भी एकरूपता आएगी।