पिट्स बीएड कॉलेज में गंगा विश्व धरोहर घोषित हो विषय पर संगोष्ठी का आयोजन हुआ। इसमें छात्र-छात्राओं ने गंगा संरक्षण के लिए सुझाव दिए। इस अवसर पर गंगा क्लब का भी गठन किया गया।
रविवार को आयोजित संगोष्ठी में कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र सिंह मेहरा ने कहा कि गंगा भारत की पुरातन संस्कृति की वाहक है। हमें इसे प्रदूषित होने से रोकने के लिए प्रशासन के साथ मिलकर प्रयास करना होगा ताकि गंगा में विद्यमान असंख्य जलीय जीवों को विलुप्त होने से बचाया जा सके। इसके अतिरिक्त वैज्ञानिक जागरूकता कार्यक्रमों व ठोस रणनीति तैयार करके इसकी सहायक जल धाराओं को भी पुनर्जीवित करने के लिए प्रयास जरूरी हैं। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. शंभू प्रसाद नौटियाल ने कहा कि हिमपुत्री गंगा का जल हिमालय की जड़ी-बूटियों से समृद्ध होकर देश के 45 करोड़ लोगों के जीवन को सीधे प्रभावित करता है। बीएड के प्रशिक्षु अध्यापक आजाद डिमरी ने कहा कि गंगा को विश्व धरोहर घोषित करने के लिए संकल्प लेते हैं कि हम गंगा को स्वच्छ और निर्मल बनाने में अपना सहयोग देंगे व गंगा को प्राणी समान मानकर इसकी रक्षा करेंगे।
वहीं प्रशिक्षु अध्यापक अतुल भट्ट ने कहा कि जिस प्रकार हम अपने शरीर का ध्यान रखते हैं सजाते संवारते हैं उसी प्रकार गंगा की पवित्रता के लिए विशेष ध्यान रखेंगे क्योंकि गंगा मानव कल्याण के लिए धरती पर अवतरित हुई है। गंगा विश्व धरोहर मंच के सदस्य सुदीप रावत ने गंगा के पारिस्थितिकीय महत्व पर प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में गंगा क्लब का गठन भी किया गया। इस मौके पर कॉलेज व्यवस्थापक विष्णु नौटियाल, प्रशिक्षु अध्यापक पंकज, अंकित, विवेक, रंजित, काजल, लक्ष्मी और अंजलि ने गंगा संरक्षण के लिए लघु शोधपत्र प्रस्तुत किए।