उत्तरकाशी के सौरा गाड पर श्रमदान से अस्थाई पुलिया तैयार करते सालू के ग्रामीण।
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आपदा से उजड़े भटवाड़ी के सालू गांव की समस्याएं हल नहीं होने से लोग परेशान हैं। पुल टूटने से बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। ग्रामीणों ने श्रमदान कर अस्थायी पुल बनाते हैं, लेकिन बारिश में पानी बढ़ने पर यह बह जाता है।
सालू गांव के ग्रामीणों को सौरा इंटर कालेज और मनेरी व उत्तरकाशी बाजार पहुंचने के लिए गांव के पास सौरा गाड़ पार करनी पड़ती है। वर्ष 2013 की आपदा में गाड़ पर बना पुल बह गया था, लेकिन उसके स्थान पर आजतक पुल नहीं बन पाया है।
सौरा इंटर कालेज में पढ़ने वाले 25 छात्रों को ढाई किमी के बजाय अब नलूणा ट्राली होकर कालेज पहुंचने को करीब 14 किमी का सफर तय करना पड़ रहा है। स्याबा गांव के 35 छात्र भी पुल नहीं बनने से इतनी ही दूरी तय कर रहे हैं।
लोगों की आजीविका का मुख्य आधार नकदी फसल है, लेकिन पुल नहीं बनने से फसल बाजार नहीं पहुंच पा रही है। हालांकि स्याबा गांव के लिए नलूणा में 1.5 क्विंटल भार ले जाने वाली ट्राली लगी है, लेकिन इससे बाजार कम ही उत्पादन पहुंच पा रहा है।
सालू के प्रधान दिनेश रावत, क्षेत्र पंचायत सदस्य नीलम राणा, स्याबा के अभि सिंह, भागवत, लोकेंद्र सिंह आदि का कहना है कि सरकार ने तीन वर्षों से सौरा गाड पर अस्थाई पुलिया बनाने में मदद नहीं की। स्याबा गांव की इंटर की छात्रा प्रियंका ने बताया कि अस्थाई पुलिया बहने के बाद स्कूल दूर होने से लड़कियां स्कूल नहीं जा रही हैं।