उत्तरकाशी के पौराणिक मर्णिकाघाट पर कुछ इस तरह जोखिम के साथ स्नान करने को मजबूर हैं तीर्थयात्री
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गंगा भागीरथी में दो बार की बाढ़ से नगर के तटवर्ती क्षेत्रों में हुई तबाही के बाद 155 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी स्नान घाट नहीं बन पाए हैं, जिससे यात्रियों को गंगा स्नान में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मनेरी बांध से फ्लशिंग के दौरान एकाएक जलस्तर बढ़ने पर स्नान के लिए घाटों पर जमा यात्रियों में भगदड़ की स्थिति हादसे को न्योता दे रही है।
नगर में सुरक्षित स्नान के लिए घाट नहीं होने से यात्रियों को जान जोखिम में डालकर स्नान करना पड़ रहा है।
वर्ष 2012-13 में गंगा भागीरथी की बाढ़ में तबाह घाट अभी तक दुरुस्त नहीं कराए जा सके हैं। यहां करीब 155 करोड़ रुपये लागत से बनाई जा रही बाढ़ सुरक्षा दीवार के बीच पौराणिक घाटों का पुनर्निर्माण भी किया जाना है। मणिकर्णिका, जड़भरत, केदारघाट तथा जोशियाड़ा, तिलोथ आदि स्थानों पर अधबने घाटों पर कहीं चेजिंग रूम नहीं है और न ही पानी में उतरकर सुरक्षित स्नान की व्यवस्था है।
आपदा की दृष्टि से नदी में जमा मलबा हटाने के लिए शासन को चार बार पत्र भेजकर स्वीकृति मांगी गई है, लेकिन इसका कोई जवाब नहीं आया। 155 करोड़ रुपये लागत से चल रहे बाढ़ सुरक्षा कार्यों में सुरक्षित स्नान घाटों का निर्माण भी शामिल है। जल्द ही स्नान घाटों का निर्माण कराया जाएगा।
-देवेंद्र पटवाल, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, उत्तरकाशी