यमुनोत्री और गंगोत्री धाम की यात्रा पर आ रहे तीर्थयात्री यहां यमुनोत्री और गंगनानी में मौजूद तप्त कुंडों में स्नान से दोहरा लाभ हासिल कर रहे हैं। इन कुंडों में स्नान का धार्मिक महत्व तो है ही साथ ही इससे स्वास्थ्य लाभ भी मिलता है।
यमुनोत्री में सूर्यकुंड में खौलते पानी में चावल, आलू आदि खाद्य पदार्थ डालने पर वह चंद मिनटों में ही पक जाते हैं। इसको यमुनोत्री मंदिर में प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है। इसी कुंड से निकलने वाली गर्म पानी की धारा दिव्य शिला से होते हुए दो तप्त कुंडों तक जाती है, जिसमें यात्री स्नान करते हैं।
प्राचीन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस कुंड में स्नान से यम यातना से मुक्ति मिलती है। इसी तरह गंगोत्री यात्रा मार्ग पर गंगनानी में भी गर्म पानी के कुंड मौजूद हैं। इस स्थान पर पाराशर ऋषि ने तपस्या की थी। इन कुंडों में स्नान से भी श्रद्धालु पुण्य लाभ अर्जित करते हैं।
धार्मिक लाभ के अलावा गर्म पानी के कुंडों में स्नान से शरीर की थकावट दूर होने के साथ ही चर्म रोगों से भी निजात मिलती है। इस पानी में गंधक की मात्रा काफी ज्यादा है। यही कारण है कि चारधाम यात्रा पर आने वाले तीर्थयात्री इन तप्त कुंडों में स्नान के लिए भीड़ जुटती है। बदलते समय के साथ इन कुंडों का व्यवस्थित ढंग से निर्माण कराया गया है। पानी की निरंतर निकासी के कारण इसमें गंदगी एक पल भी नहीं ठहरती।
सूर्य का वरदान हैं तप्त कुंड
बड़कोट। यमुनोत्री के तीर्थ पुरोहित सुशील उनियाल, पवन उनियाल, मनमोहन उनियाल, आशीष आदि बताते हैं कि मां यमुना ने जब अपने पिता सूर्य के सामने यह समस्या रखी कि उनके दर्शन को यहां आने वाले भक्त क्या खाएंगे, तब सूर्य ने यमुनोत्री में तप्त कुंड का वरदान दिया था। यमुना के भाई यमराज ने भी इस कुंड में स्नान से यम की यातना से मुक्ति का वरदान दिया था।
चर्म रोगों के निदान में कारगर
उत्तरकाशी। जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा अधिकारी डा.डीडी बधानी बताते हैं कि प्राकृतिक तौर पर गर्म पानी के स्रोत गंधक से निकलते हैं। गंधक का पानी चर्म रोगों से निदान के लिए काफी फायदेमंद होता है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में गर्म पानी में स्नान से थकावट दूर होना भी स्वाभाविक है।