भैरों घाटी से गंगोत्री तक आधे हिस्से के बजाय डामरीकरण की तैयारी के लिए पूरी सड़क पर नुकीले पत्थरों की परत बिछाने से तीर्थ धाम की आवाजाही में मुश्किलें खड़ी हो गई है। कई गाड़ियों के टायर फटने से लोगों को कई किमी पैदल चलना पड़ रहा है।
पर्यटक, आश्रम के साधु संत, कारोबारी तथा निर्माण में लगे मजदूरों की भीड़ बढ़ने के बावजूद बिजली तो दूर आधी गंगोत्री में पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं है। मंदिर के कपाट खुलने तक गंगोत्री हाईवे के 9 किमी हिस्से में डामरीकरण का काम पूरा होना मुश्किल लग रहा है।
कारोबारी, आश्रम तथा निर्माण में लगे विभागों के वाहन सामान लेकर जा तो रहे हैं, लेकिन सड़क के कुछ हिस्से आवाजाही के लिए नहीं छोड़ने से गाड़ियां सड़क पर बिछे पत्थरों पर चल रही है। गंगोत्री जा रही साध्वी वैष्णवी, ब्रह्मचारी अनिल स्वरूप, भरत सिंह आदि के वाहन का भैरोंघाटी से 800 मीटर आगे टायर फट गया था।
ऐसे में उन्हें आठ किमी पैदल चलकर गंगोत्री पहुंचना पड़ा। कई ओर पर्यटकों की गाड़ी के टायर फटने की जानकारी मिल रही है। यात्रा सीजन सिर पर है तथा अवैज्ञानिक ढंग से सड़क ठीक करने का काम होने से गुस्साए अनिल स्वरूप ब्रह्मचारी ने तो डीएम से शिकायत कर बीआरओ से क्षतिपूर्ति की मांग कर डाली।
बीआरओ के मजदूरों ने यात्रा के स्वागत के लिए जगह-जगह लगे फ्लैक्स बैनर उतारकर उसे बिछा दिए हैं। भागीरथी के बाएं हिस्से वाले गंगोत्री धाम में पेयजल लाइन ठीक नहीं होने से आश्रम तथा होटल वाले यात्री नहीं ठहर रहे हैं। जल संस्थान के अधिकारी शीघ्र फिल्टर टैंक सफाई तथा पेयजल लाइन ठीक करने की बात कर रहे हैं।
भैरों घाटी से गंगोत्री तक डामरीकरण की तैयारी के लिए पहले जीआई 1 का काम कराना जरूरी है। वे शीघ्र इसके ऊपर मिट्टी की परत बिछाकर रोलर से इसे समतल करने का काम करा रहे हैं। डामरीकरण में अभी कुछ समय लगेगा।
सोमेंद्र बनर्जी, कमान अधिकारी बीआरओ।