आत्महत्या के लिए प्रेरित करने के चार साल पुराने मामले में जिला सत्र न्यायाधीश ने आरोपी को सात साल का कठोर कारावास तथा 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। 22 अप्रैल 2011 को बड़कोट में एक छात्रा ने जहर पीकर आत्महत्या कर ली थी।
22 अप्रैल 2011 को बड़कोट में कमरा लेकर रहने वाली भाटिया गांव की शशिबाला पुत्री सूरत चंद रमोला ने जहर पीकर आत्महत्या कर ली थी।
उसके पास मिले सुसाइड नोट के आधार पर लड़की के पिता ने पुलिस में गडाल बनाल गांव निवासी शिवराज और उसके चचेरे भाई दीपक के विरुद्ध आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का मुकदमा दर्ज कराया था।
विधि विज्ञान प्रयोगशाला में हुई बिसरा जांच में जहर के सेवन से मौत तथा सुसाइड नोट लड़की के हाथों से लिखा होने की पुष्टि हुई। बताया जा रहा है कि लड़की का दीपक के साथ प्रेम संबंध था।
लड़की द्वारा शादी के लिए जोर डालने पर दीपक और उसके चचेरे भाई शिवराज ने उसकी पिटाई कर घर से निकाल दिया था। इससे क्षुब्ध होकर लड़की ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी।
सुसाइड नोट में लड़की ने इसका जिक्र किया था। जिला शासकीय अधिवक्ता हुकम सिंह रावत ने मामले में 13 गवाह एवं साक्ष्य पेश किए। दोष सिद्ध होने पर शनिवार को जिला सत्र न्यायाधीश राजेंद्र सिंह ने आरोपी शिवराज को सात साल का कठोर कारावास तथा 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
पुलिस ने जमानत पर रिहा शिवराज को गिरफ्तार कर नई टिहरी जेल भेज दिया, जबकि घटना के समय नाबालिग दीपक की सुनवाई बाल न्यायालय में चल रही है।