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संत सुभद्रा तपोवनी माता हुईं ब्रह्मलीन

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तपोवन हिमालय क्षेत्र में कई दशकों तक साधना करने वाली संत सुभद्रा तपोवनी माता लंबी बीमारी के बाद बृहस्पतिवार को ब्रह्मलीन हो गई। उनके पार्थिव शरीर को गंगोरी उत्तरकाशी स्थित उनके आश्रम में महासमाधि दी जाएगी।
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तपोवनी आश्रम से जुड़े हरीश डंगवाल, महेश पंवार ने बताया कि संत सुभद्रा माता ने करीब चार दशक तक गंगोत्री, भोजवासा एवं तपोवन क्षेत्र में कठिन तप साधना की थी। करीब एक दशक तक तपोवन में साधना करने के कारण उन्हें तपोवनी माता के नाम से ही जाना जाता था। वर्ष 1991 में अधिक उम्र के चलते वे धराली स्थित आश्रम में आ गईं थीं। धराली एवं गंगोरी स्थित आश्रम के माध्यम से वह निरंतर समाज हित के कार्यों में संलग्न रहीं। बीते दो वर्षों से वह अस्वस्थ चल रही थीं और हरिद्वार स्थित रामकृष्ण मिशन अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था। बृहस्पतिवार को करीब 90 वर्ष की आयु में वह ब्र्रह्मलीन हो गईं। उन्होंने बताया कि ब्रह्मलीन संत माता सुभद्रा के पार्थिव शरीर को उत्तरकाशी लाया जा रहा है। कल (आज) गंगोरी स्थित तपोवनी माता आश्रम में उन्हें महासमाधि दी जाएगी।
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