मनेरी सेवाश्रम से जुड़े स्वयंसेवक आगामी नौ फरवरी को समाजसेवी डा. नित्यानंद (90) के जन्मदिन की तैयारी कर रहे थे कि अचानक उनके निधन की सूचना ने सभी को झकझोर दिया है।
अविवाहित रहकर अपना पूरा जीवन जनसेवा में समर्पित करने वाले डा. नित्यानंद वर्ष 1991 के भूकंप के बाद से जनपद में सक्रिय हुए थे।
भूगोल प्रवक्ता रहे डा. नित्यानंद ने वर्षों तक डीवीएस कालेज देहरादून एवं अलीगढ़ में सेवाएं दीं। वर्ष 1985 में सेवानिवृत्ति के बाद वे दस साल तक आरएसएस के प्रांत कार्यवाह रहे। वर्ष 1991 के भूकंप ने उन्हें झकझोर दिया था।
तभी उन्होंने उत्तरांचल दैवी आपदा पीड़ित सहायता समिति के बैनर तले मनेरी में सेवाश्रम और नैटवाड़ में कर्ण आश्रम की स्थापना की। इस दौरान उन्होंने पिलंग, जौड़ाव, मुखबा, धराली, मोरी, नैटवाड़ आदि क्षेत्रों के गांवों में एकल शिक्षा की व्यवस्था कर बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था की। इन गांवों में पुनर्वास कार्यों को भी उन्होंने बखूबी अंजाम दिया।
वर्ष 1993 में उन्होंने मनेरी सेवाश्रम में पांच गरीब बच्चों के लिए छात्रावास की शुरूआत की। इन 15 सालों में मनेरी, लक्षेश्वर एवं नैटवाड़ में उनके द्वारा खोले गए आवासी स्कूलों से एक हजार से अधिक गरीब छात्र हैं।
डा. नित्यानंद की सेवा में समर्पित रमेश राणा ने बताया कि उन्हें गरीबी के कारण पढ़ाई से वंचित ग्रामीण बच्चों की पीड़ा सताती थी। वे अपनी पेंशन से जिले के 50 बच्चों को छात्रवृत्ति देते थे।
डा. नित्यानंद के निधन पर पूर्व विधायक गोपाल रावत, भाजपा जिलाध्यक्ष रामसुंदर नौटियाल, सूरतराम नौटियाल, बुद्धि सिंह पंवार, मुरारीलाल भट्ट, नेमचंद चंदोक, जयवीर चौहान, रामानंद भट्ट, लोकेंद्र बिष्ट, महावीर नेगी, नागेंद्र चौहान, हरीश डंगवाल, हरीश सेमवाल, बालशेखर नौटियाल आदि ने शोक जताया।