हर्षिल मुखबा जांगला 9.5 किमी मोटर मार्ग 36 वर्ष बीतने के बाद भी तैयार नहीं हो पाया। वन भूमि हस्तांतरण की समय पर पैरवी नहीं करने और एकमुश्त के बजाय टुकड़ों में बजट की स्वीकृति लेकर काम कराने में लोनिवि के अधिकारियों की दिलचस्पी से यह नौबत आई है।
सड़क वर्ष 1978-79 में स्वीकृत हुई थी। वन भूमि हस्तांतरण व ठेके देने में आए गतिरोध व कई बार के पुनरीक्षित आगणन के कारण आखिर 273.74 लाख की लागत से गत वर्ष 4.75 किमी मुखबा गांव की सड़क तैयार हो पाई। इस वर्ष पुरानी सड़क पर 169.81 लाख की लागत से डामरीकरण का कार्य करने की तैयारी की जा रही है।
स्थिति यह है कि कई बार आंदोलन के के बजाय लोनिवि के अधिकारियों ने मुखबा से जांगला तक शेष 4.75 किमी हिस्से में सड़क का सर्वेक्षण कराके इससे लिए अलग बजट की मांग की व वन भूमि हस्तांतरण की कार्रवाई की।
गत वर्ष जनता के भारी दबाव के कारण लोनिवि ने शेष सड़क का सर्वे करके अब किसी तरह वन भूमि हस्तांतरण का प्रकरण वन विभाग को स्वीकृति के लिए सौंप दिया है। मुकेश सेमवाल, सुरेश सेमवाल, संजीव सेमवाल का कहना है कि पगडंडी से गुमगुम नाले के जीर्णशीर्ण पुल से जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ता है।
बीते साल सड़क का सर्वेक्षण का कार्य पूरा कर 4.592 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरण का प्रकरण वन विभाग को भेजा जा चुका है। 169.81 लाख की लागत से मुखबा तक अगले वर्ष सड़क निर्माण पूरा हो पाएगा।
-राजेंद्र सिंह खत्री, ईई, लोनिवि भटवाड़ी।
हर्षिल मुखबा जांगला मोटर मार्ग वाकई यात्रा महत्व का बन सकता है। मेरे संज्ञान में कभी सड़क निर्माण की अड़चनों को नहीं लाया गया। यात्रियों की सुविधा के लिए सरकार की स्वदेश योजना में इस अधूरी सड़क को प्रस्तावित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
-श्रीधरबाबू अद्दांकी, डीएम, उत्तरकाशी।