कांग्रेस को पुरोला सीट से तगड़ा झटका लगा है। कांग्रेसी नेता व पूर्व विधायक राजेश जुवांठा भाजपा में शामिल हो गए हैं। टिकट न मिलने से नाराज चल रहे राजेश जुवांठा रविवार को देहरादून में भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय बहुगुणा और सांसद रमेश पोखरियाल निशंक के सामने भाजपा में शामिल हुए हैं।
राजेश जुवांठा का कांग्रेस से डेढ़ दशक पुराना नाता रहा है। उनकी मां शांति जुवांठा प्रदेेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष और विकास नगर पालिकाध्यक्ष रह चुकी हैं जबकि पिता बरफिया लाल जुवांठा उत्तर प्रदेश सरकार में पर्वतीय विकास मंत्री रह चुके हैं। उत्तराखंड के पहले विधानसभा चुनाव 2002 में शांति जुवांठा ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था।
उस समय भाजपा के मालचंद ने शांति जुवांठा को हराया था। मालचंद को 13209 और शांति जुवांठा को 10238 मत मिले थे। 2007 में राजेश को पहली बार कांग्रेस ने पुरोला से टिकट दिया और वह सबसे कम उम्र के विधायक भी बने थे। उस समय राजेश ने मालचंद को हराया था। राजेश को 15467 और मालचंद को 14942 मत मिले थे।
पार्टी ने राजेेश जुवांठा को 2012 मेें फिर से विधानसभा टिकट दिया, लेकिन इस बार उन्हें तीसरे स्थान के साथ संतोष करना पड़ा। 2012 विस चुनाव में पुरोला से भाजपा के मालचंद को 18098, निर्दलीय राजकुमार को 14266 और राजेश जुवांठा को 10804 मत मिले थे। इसके बाद 2015-16 में राजेश कांग्रेस पार्टी में प्रदेश महासचिव भी रहे थे। इस बार 2017 विस चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा के बागी राजकुुमार पर दांव खेलकर उन्हें पुरोला से प्रत्याशी खड़ा कर दिया।
इसके बाद से राजेश जुवांठा नाराज चल रहे थे और डेढ़ दशक तक कांग्रेस में रहने के बाद रविवार को भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा में शामिल होने के बाद राजेश जुवांठा ने कांग्रेस पार्टी को मुख्यमंत्री हरीश रावत की निजि कांग्रेस बताते हुए पुरोला विधानसभा की उपेक्षा का आरोप लगाया है।