जल विद्युत निगम जून 2013 की आपदा में क्षतिग्रस्त हुई 2250 किलोवाट की पिलंगगाड लघु जल विद्युत परियोजना को चालू नहीं कर पाया है, जबकि इसी बाढ़ में यमुना घाटी में क्षतिग्रस्त हुई निजी कंपनी की तीन परियोजनाएं आपदा के एक साल के भीतर ही चालू हो गई है।
जून 2013 की बाढ़ में असी गंगा पर निर्माणाधीन जल विद्युत निगम की असी गंगा प्रथम एवं द्वितीय तथा काल्दीगाड परियोजना बह गई थी। पिलंगगाड पर बनी 2250 किलोवाट की लघु जल विद्युत परियोजना के हेड एवं पावर चैनल क्षतिग्रस्त हुए थे।
यमुना घाटी में यमुना, हनुमानगंगा और बडियारगाड पर बनी हिमाचल प्रदेश के रीजेंसी ग्रुप की तीन परियोजनाओं को भी खासा नुकसान पहुंचा था।
आपदा को दो साल बीतने के बाद भी निगम की चारों परियोजनाएं ठप पड़ी हैं, जबकि रीजेंसी ग्रुप ने महज एक साल से भी कम समय में तीनों परियोजनाएं चालू कर दी है।
असी गंगा पर बनी तीनों परियोजनाओं पर अभी तक काम भी शुरू नहीं हो पाया है। दो साल बाद पिलंगगाड परियोजना की मरम्मत के लिए करीब दस करोड़ की निविदा कर गोगोल हाइड्रो पावर को काम सौंपा गया है, लेकिन इसे दुरुस्त करने में अभी दो साल और लगने की बात कही जा रही है।
कोट..........
पिलंगगाड परियोजना में बाढ़ से हुई क्षति का आंकलन और विशेषज्ञों से अध्ययन कराकर डीपीआर तैयार कराने तथा बजट स्वीकृति आदि में समय लगने की वजह से विलंब हुआ। अब करीब दस करोड़ में इसकी मरम्मत की जिम्मेदारी गोगोल हाइड्रो पावर कंपनी को सौंपी गई है। अनुबंध के मुताबिक यह परियोजना जून 2017 तक चालू हो पाएगी।
जेके उपाध्याय, ईई, पिलंगगाड लघु जल विद्युत परियोजना।
आपदा में क्षतिग्रस्त हुई लघु जल विद्युत परियोजनाएं
परियोजना क्षमता कंपनी वर्तमान स्थिति
असी गंगा प्रथम 4.5 मेगावाट जल विद्युत निगम कार्य शुरू नहीं।
असी गंगा द्वितीय 4.5 मेगावाट जल विद्युत निगम कार्य शुरू नहीं।
काल्दीगाड 9 मेगावाट जल विद्युत निगम कार्य शुरू नहीं।
पिलंगगाड 2.25 मेगावाट जल विद्युत निगम ठप पड़ी है।
हनुमानगंगा 5 मेगावाट रीजेंसी ग्रुप हिमाचल उत्पादन कर रही है।
गंगनानी 8 मेगावाट रीजेंसी ग्रुप हिमाचल उत्पादन कर रही है।
बडियारगाड 5 मेगावाट रीजेंसी ग्रुप हिमाचल उत्पादन कर रही है।