ऋण जमा करने की किसानों के सामने बनी है चुनौती
पुरोला (उत्तरकाशी)। सूखे की मार रामा व कमल सिराईं पट्टी के किसानों की आजीविका पर भारी पड़ रही है। बारिश नहीं होने से मटर की फसल खेतों में सूखने के कगार पर है। बारिश के इंतजार में काश्तकार आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए है।
पुरोला क्षेत्र के रामा सिराईं के गुंदीयाट गांव, पोरा, कंडियाल गांव, रौन, मठ, सुकडाला सहित कमल सिराईं के खलाड़ी, चंदेली, नेत्री, स्वील, करड़ा, पुजेली, चपटाडी, कुमोलाव व दर्जनों गांवों में मटर का उत्पादन नकदी फसल के रूप में किया जाता है। धान की फसल निकलने के बाद हजारों क्विंटल मटर का बीज आढ़तियों व उद्यान विभाग से लेकर काश्तकार प्रमुखता से मटर का उत्पादन करते हैं।
मटर की फसल क्षेत्र के हजारों लोगों की आर्थिकी का मुख्य साधन भी है। मटर का अच्छा उत्पादन होने से किसान बच्चों की पढ़ाई लिखाई सहित सालभर का पारिवारिक खर्च चलाते हैं। किसानों ने धान वाले सिंचित खेतों में मटर की फसल तैयार करने के लिए बीते अक्तूबर में मटर के बीज बो दिए थे, लेकिन तीन माह बाद खेत खाली दिखाई दे रहे हैं। खेतों में मटर की पौधों की ग्रोथ नहीं हो पा रही है। बिना बारिश के फसल सूखने लगी है।
मटर उत्पादक किसान श्यालिक राम नौटियाल, गुरुदेव रावत, दीवान सिंह, हकूमत सिंह रावत ने बारिश न होने पर चिंता व्यक्त करते हुए मटर की फसल खराब होने लगी है। अगर आगामी 15 से 20 दिन बाद भी ऐसे ही सूखे की स्थिति बनी रहती है,तो क्षेत्र के हर गांव के काश्तकारों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है। इस स्थिति में किसान कृषि ऋण का भुगतान भी जमा नहीं कर पाएंगे।