देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के विरोध में गंगोत्री धाम और मुखबा में तीर्थ पुरोहितों का धरना आंदोलन शनिवार को भी जारी रहा। तीर्थ पुरोहितों ने बोर्ड को रद्द किए जाने तक आंदोलन जारी रखने का एलान किया है।
राज्य सरकार की ओर से चार धाम समेत 51 प्राचीन मंदिरों की व्यवस्थाओं के संचालन के लिए देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड का गठन किया है। शुरूआत से ही तीर्थ पुरोहित इसका विरोध कर रहे हैं। गंगोत्री मंदिर समिति ने मामले को लेकर हाईकोर्ट में भी रिट दायर की है, जिस पर 29 जून को सुनवाई होनी है।
इधर देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के खिलाफ गंगोत्री धाम में तीर्थ पुरोहित तीसरे दिन भी धरने पर डटे रहे। उन्होंने सरकार एवं बोर्ड के खिलाफ नारेबाजी करते हुए बोर्ड को रद्द किए जाने तक आंदोलन जारी रखने का एलान किया। मुखबा गांव में भी तीर्थ पुरोहितों ने धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों में गंगोत्री मंदिर समिति के उपाध्यक्ष अरुण सेमवाल, राकेश सेमवाल, प्रेमवल्लभ, गोवर्द्धन, विष्णु प्रसाद, माया प्रसाद, संतोष, कमल, विवेकानंद, अमरेश, प्रेम सेमवाल आदि तीर्थ पुरोहित शामिल रहे।
कोरोना संक्रमण में यात्रा शुरू करना गलत
रुद्रप्रयाग। देवस्थानम बोर्ड के विरोध में केदारनाथ मंदिर परिसर में तीर्थ पुरोहित संतोष त्रिवेदी का अर्धनग्न होकर धरना 15वें दिन भी जारी रहा। वे सुबह, दोपहर और शाम को बाबा केदार की पूजा-अर्चना व सांयकालीन आरती के समय धरना दे रहे हैं। कहा कि प्रदेश सरकार ने तीर्थ पुरोहितों की अनदेखी कर मंदिर की आमदनी को ध्यान में रखकर देवस्थानम बोर्ड गठित किया है, जो हमें मान्य नहीं हैं। उन्होंने कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप के बीच सरकार के आगामी 15 जुलाई से चारधाम यात्रा संचालन के निर्णय पर भी सवाल उठाया है। कहा कि एक तरफ कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है, दूसरी तरफ बरसात शुरू होने वाली है। इन हालातों में धामों में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा व सुविधाओं का इंतजाम कैसे होगा, इसका जवाब सरकार के पास नहीं है। इधर, केदार सभा के अध्यक्ष विनोद शुक्ला, कुबेरनाथ पोस्ती, लक्ष्मीनारायण जुगराण ने भी त्रिवेदी के आंदोलन का समर्थन किया है।