राजकीय नारी निकेतन महिला कल्याण के सरकारी दावों की खिल्ली उड़ा रहा है। निराश्रित महिलाओं के लिए वर्ष 1978 में नौगांव में खोला गया नारी निकेतन बंदी की कगार पर है। एक चौकीदार के भरोसे चल रहे इस नारी निकेतन के लिए तीन साल से एक धेला बजट नहीं मिला। ऐसे में महिलाओं को स्वरोजगार परक प्रशिक्षण देने की गतिविधियां ठप पड़ी हैं।
समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित इस केंद्र में अनुसूचित जाति एवं जनजाति तथा निराश्रित महिलाओं को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की गई। यहां प्रवेश पाने वाली गरीब महिलाओं को नौ माह तक अक्षर ज्ञान एवं सिलाई कटाई का निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता था। ताकि वह स्वरोजगार अपना कर अपनी आजीविका मजबूत कर सकें।
बीते एक दशक से यह नारी निकेतन अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। यहां अधीक्षिका, सहायक अध्यापिका, क्लर्क, रसोइया आदि के सभी दस पद रिक्त पड़े हैं। यहां सिर्फ एक चौकीदार दिनेश कुमार तैनात है। बजट के अभाव में महिलाओं का प्रवेश भी नहीं हो पा रहा है। ऐसे में चौकीदार की जिम्मेदारी रोजाना केंद्र का ताला खोलने और बंद करने व राष्ट्रीय दिवसों पर ध्वजारोहण करने तक की है।
बजट मिले और कर्मचारी तैनात हों
ब्लाक प्रमुख रचना बहुगुणा, पूर्व विधायक राजकुमार, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष रणवीर रावत, व्यापार मंडल अध्यक्ष शशिमोहन राणा आदि क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि निराश्रित महिलाओं की आजीविका संबंधी प्रशिक्षण से जुड़े इस केंद्र की बदहाली हैरान करने वाली है। उन्होंने कहा कि इस नारी निकेतन को बंद नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने सरकार से शीघ्र नारी निकेतन के लिए बजट की व्यवस्था करने और यहां कर्मचारी तैनात करने की मांग की है।
तीन साल से नारी निकेतन के लिए बजट न मिलने से यहां प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं चल पा रहे हैं। यहां सभी पद रिक्त होने के कारण प्रशिक्षु महिलाओं को प्रवेश भी नहीं दिया जा रहा है। शासन को पत्र लिखकर बजट की मांग की गई है। बजट मिलने पर ही नारी निकेतन का संचालन किया जा सकता है।
- मदन लाल, समाज कल्याण अधिकारी, उत्तरकाशी।