प्रसव के लिए आने वाली अधिकतर गर्भवतियों को करना पड़ता है हायर सेंटर देहरादून रेफर
नौगांव (उत्तरकाशी)। उत्तराखंड बनने के ढाई दशक बाद भी यमुनाघाटी में स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार नहीं हो पाया है। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं महज सपना बन कर रह गई है। यमुनाघाटी में पुरोला विधान सभा सहित यमुनोत्री विधान सभा की 40 प्रतिशत आबादी निवास करती है लेकिन क्षेत्र के किसी भी अस्पताल में ब्लड बैंक की सुविधा नहीं है। इस कारण इन अस्पतालों में प्रसव के लिए आने वाली अधिकतर गर्भवतियों को हायर सेंटर देहरादून रेफर करना पड़ता है।
सीएचसी नौगांव और उप चिकित्सालय पुरोला में रक्त संग्रह केंद्र बनाए गए हैं जिनमें जिला चिकित्सालय से खून की उपलब्धता की जानी है लेकिन अभी तक दोनों केंद्रों में सुविधा शुरू नहीं हो पाई है, लोग राज्य बनने के बाद से ही यमुना घाटी में ब्लड बैंक की मांग कर रहे हैं जो आज तक नहीं खुल पाया है।
अस्पतालों में खून की व्यवस्था न होने से अधिकतर गर्भवती महिलाओं में खून की कमी को देखते हुए प्रसव के दौरान डेढ़ सौ किमी दूर रेफर करना पड़ रहा है जिससे कई बार गर्भवती महिला की जान को खतरा बना रहता है। पौने दो लाख की आबादी वाले यमुनाघाटी में ब्लड बैंक न होना जनता के चुने हुए जनप्रतिनिधियों की कार्य शैली पर सवाल खड़े करती है। यमुनाघाटी के सबसे पुराने अस्पताल सीएचसी नौगांव में भी ब्लड बैंक की सुविधा नहीं है, जबकि यह अस्पताल चारधाम यात्रा के प्रथम पड़ाव पर स्थित है।
अस्पताल पर सौ से भी अधिक ग्राम पंचायतों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी है। सीएचसी के चिकित्साधीक्षक डॉ. रोहित भंडारी का कहना है कि क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यमुना घाटी में प्रोपर ब्लड बैंक की सुविधा होना जरूरी है। पुरोला और नौगांव में रक्त संग्रह केंद्र को एनएचएम के तहत सक्रिय करने की कोशिश की जा रही है।