बाढ़ से तबाह हुए नगर के स्नान घाटों की दशा जल्द सुधरने वाली है। नमामी गंगे प्रोजेक्ट के तहत इनका कायाकल्प होने जा रहा है। पहले चरण में 37.49 करोड़ से मणिकर्णिकाघाट, जड़भरत घाट सहित 9 घाटों का जीर्णोद्धार किया जाना है।
इसके लिए सिंचाई विभाग को केंद्र सरकार से सैद्धांतिक स्वीकृति मिलने के साथ-साथ बजट भी मिल गया है। इसके बाद दूसरे चरण में गंगोत्री से लेकर धरासू तक भागीरथी नदी के दोनों तरफ 15 स्नान घाटों का जीर्णोद्धार करने की योजना बनाई गई है।
गंगा भगीरथी नदी की स्वच्छता लिए केंद्र सरकार की ओर से बनाया गया नमामी गंगे प्रोजोक्ट से अब गंगोत्री से लेकर धरासू तक वर्ष 2012-13 की बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुए स्नान घाटों की दशा सुधरेगी। प्रोजेक्ट के तहत पहले चरण में स्वीकृति 37.49 करोड़ की लागत से मणिकर्णिका, जड़भरत, केदारघाट, मंगलाघाट, नैताला, तिलोथ, हीना तथा मनेरी में भागीरथी के किनारे घाटों का जीर्णोद्धार किया जाएगा। सिंचाई विभाग के ईई पीएस पंवार ने बताया कि निर्माण कार्य शुरू करने की सभी औपचारिकताएं पूर्ण कर दी है।
दूसरे चरण में सिंचाई विभाग ने डुंडा, ज्ञानसू, धरासू, नागेश्वर धाम नाकुरी, नलूणा, भटवाड़ी, झाला, हर्षिल, धराली तथा गंगोत्री आदि 15 स्थानों को चिह्नित किया है। बता दें कि बाढ़ में गंगोत्री से लेकर उत्तरकाशी तक नदी तट के सभी पौराणिक घाट तबाह हो गए थे।