साथ में नाग देवताओं की भोग मूर्ति भी विराजी
बड़कोट। रवांई घाटी के हजारों श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति की अधिष्ठाती देवी मां भद्रकाली में शारदीय नवरात्र के शुभारंभ पर अपने मूल थान मोल्डा गांव के पौराणिक मंदिर में विराजमान हो गई। साथ ही उनके भौसर-पौसर नाग देवताओं की मूर्तियां भी विराजमान हुई। अब एक साल तक मां भद्रकाली और नाग देवताओं के दर्शन मोल्डा मंदिर में होंगे। इससे पूर्व मां भद्रकाली और नाग देवता पौंटी गांव के मंदिर में विराजमान थे।
सोमवार को दोपहर के समय पौंटी में सैकड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में मां भद्रकाली और नाग देवताओं की पूजा-अर्चना हुई। उसके बाद मां भद्रकाली व नाग देवताओं की भोग मूर्तियों का शृंगार कर पाली के अंदर गोतखली और झोलियों में रखा गया। इसके साथ ही मां भद्रकाली की पालकी का शृंगार किया गया। इसके बाद पौंटी, मोल्डा, डंडाल गांव, खांसी, बिनाई, कंताड़ी, हुडोली, पाणी गांव, नैलाडी, सुनारा, सौंदाड़ी, नाड़ा -संखाल सहित क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालु मोल्डा के लिए प्रस्थान किया।
मोल्डा गांव में ग्रामीणों ने मां भद्रकाली व नाग देवताओं का भव्य स्वागत किया। देर शाम को मोल्डा गांव मंदिर में मां भद्रकाली व नाग देवताओं की भोग मूर्तियों की पूजा-अर्चना कर गद्दी पर विराजमान कराए गए। इस मौके पर कुलानंद बहुगुणा, बुद्धिराम बहुगुणा, देवप्रसाद बहुगुणा, चंद्रमोहन बहुगुणा, यशवंत रावत, रविंद्र भंडारी, संजय चौहान, रुकम सिंह राणा, सुंदर सिंह पंवार, करम चंद चौहान आदि मौजूद रहे।