जिला पंचायत की ओर से माघ मेला का समापन करने के बाद मेला कारोबारी जहां मेला अवधि बढ़ाने की मांग कर रहे हैं,
वहीं स्थानीय व्यापारियों ने मेला प्रांगण में लगे व्यवसायिक स्टाल तुरंत समेटने की मांग करते हुए नगर में प्रदर्शन किया।
जिला प्रशासन ने रात तक आजाद मैदान से दुकानें हटाने को कहा और दोपहर से ही नगर पालिका ने दुकानों और फड़ व्यापारियों से तहबाजारी वसूलना शुरू कर दिया। इसमें भी कम पैसे की रसीद देकर ज्यादा वसूली के आरोप लग रहे हैं।
मकर संक्रांति से शुरू हुआ पौराणिक माघ मेला बृहस्पतिवार को संपन्न हो गया।
मेला समापन के साथ ही मेला मंच तथा सरकारी स्टाल समेट लिए गए, जबकि व्यवसायिक स्टाल अब भी सजे हुए हैं। मेला कारोबारियों ने जिला पंचायत से मेला अवधि 26 जनवरी तक बढ़ाने की मांग की।
इससे इंकार करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष जशोदा राणा ने बृहस्पतिवार रात को ही औपचारिक समापन के साथ ही माघ मेला प्रांगण के लिए लिया गया बिजली का कनेक्शन कटवा दिया।
मेला कारोबारियों ने इस संबंध में एडीएम अशोक पांडेय और एसडीएम भटवाड़ी राजकुमार पांडेय से भी मुलाकात की, लेकिन उन्होंने मेला अवधि बढ़ाने से इंकार करते हुए शुक्रवार रात तक ही दुकानें समेटने के आदेश दिए।
वहीं मेला अवधि बढ़ाए जाने की सुगबुगाहट के बीच नगर के व्यापारियों ने जिला मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि मेला कारोबार के चलते स्थानीय व्यवसाय प्रभावित होता है।
प्रदर्शन करने वालों में व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष सुभाष बडोनी, अंकित उप्पल, यशपाल पंवार, रमेश चौहान, अजय बडोला, गोपाल राणा, ज्ञान तमांग आदि व्यापारी शामिल रहे।
शुक्रवार को नगर पालिका ने दुकानों और फड़ व्यापारियों से तहबाजारी वसूली। मेला कारोबारियों का आरोप है कि रसीद पर पैसे दर्ज किए बगैर उनसे एक दिन का ही एक से डेढ़ हजार रुपये वसूला गया।
इंसेट
ऐसे तो माघ मेले में नहीं आएंगे कारोबारी
उत्तरकाशी। वर्षों से माघ मेला में कारोबार करने उत्तरकाशी पहुंचने वाले काशीपुर के महबूब खान, विकासनगर के इरशाद, रुड़की के नबाब कुरैशी, जमीर खान, सतीश, लुधियाना के रोहित, रणजीत, मुरादाबाद के मोहम्मद अफसार, रामपुर के अमित आदि ने बताया कि हर साल मेला समाप्त होने के चार दिन बाद तक मेला लगा रहता है।
इसमें दूरस्थ गांवों से आने वाले ग्रामीण सस्ती दरों पर अपनी जरूरत का सामान खरीदते हैं।
बचे हुए सामान को वापस ले जाने में ज्यादा ढुलान भाड़े से बचने के लिए कारोबारी इन दिनों सस्ती दरों पर सामान बेचते हैं।
इस बार माघ मेले में दुकानें 25 से 40 हजार रुपये की दर से मिलीं और मेले के शुरुआती दिन फीके रहे। अब नगर पालिका की तहबाजारी की आड़ में भी अवैध वसूली की जा रही है।
साथ ही दुकानों के ठेकेदार भी उनसे पैसे वसूल रहे हैं। उन्होंने इन अव्यवस्थाओं पर नियंत्रण न लगने पर अगली बार से माघ मेला में न आने की बात कही।