दशकों से पसरी साहित्यिक गतिविधियों की जड़ता को तोड़ने के लिए आयोजित लोकरंग साहित्य उत्सव सफल रहा। उत्सव के तीसरे सत्र में गढ़वाली कवि सम्मेलन हुआ।
काव्य गोष्ठी में गणेश खुगशाल गणी ने जुंगा चाहे कथगै झपन्यका झड़ झड़ा खड़खड़ा हो न पर जूंगा सदानि डर्यां रौंदन और जूता सूबेदार बोड़ा कविताएं प्रस्तुत की।
लोग गायक कवि ओम बधाणी ने गौं म मिलि जौंन ज सुख सुविधा त किलै पलायन होलो, पेटेंट और चिट्ठियों का गडोला रचना प्रस्तुत की। गजेंद्र नौटियाल ने तनखा खै, कमीशन खै कुछ लुकाई कुछ मुच्चाई, मन्ना क बाद कुझाणी भै कैन खाई।
ओम प्रकाश सेमवाल ने इक आंदोलन हिमालै बै सुलगुणू आंदोलन डांडा कांठौ बै सुलगणू और माछी पकड़ माछी पकड़ डौंका रचना प्रस्तुति दी।
कवि जगदंबा चमोला ने जु छा यख सब उन्द जयां छिन, यख सुख्या मुंगरयौट बचां छिन... का कविता पाठ किया। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी ने की।
उन्होंने भूकंप और नजीबाबाद कु इफ्तकार हुसैन बैंड बाजों पर बढैं बजौणू छ आदि कविता प्रस्तुत की। पालिकाध्यक्ष जयेंद्री राणा ने गढ़वाली में भाषण दिया।
कार्यक्रम में संयोजक सुरेंद्र पुरी, मोहन डबराल, त्रेपन पंवार, डा. रामचंद्र उनियाल, सुरक्षा रावत, प्रमोद पैन्यूली, संजय पैन्यूली, नवीन कठैत, अजय पुरी, राजीव तलवाड़ आदि मौजूद थे।