मानसून के बाद आपदा के तहत सुरक्षात्मक कार्य नहीं होने से बढ़ रहा है खतरा
ग्रामीणों ने की भू वैज्ञानिकों से सर्वे कराने की मांग
उत्तरकाशी। जनपद मुख्यालय से सटे सिल्याण गांव में मानसून सीजन के बाद आपदा के तहत सुरक्षात्मक कार्य नहीं होने पर वहां पर खतरा बढ़ता ही जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि शीतकाल में हल्की बरसात में भी वहां पर रास्तों और दीवारों पर भू-धंसाव हो रहा है। साथ ही उनका मुख्य पेयजल स्रोत पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। इसलिए अब गांव में पेयजल की समस्या भी शुरू हो गई है।
सिल्याण गांव के दीपक पंवार, गब्बर सिंह, मनोज राणा, अमन आदि का कहना है कि उनके गांव में वर्ष 2024 से ही भू-धंसाव की समस्या शुरू हो गई थी। शासन-प्रशासन की लापरवाही के कारण गत वर्ष यह समस्या ओर भी विकराल हो गई। उस समय भूवैज्ञानिक सर्वे कर जल्द ही आपदा के तहत सुरक्षात्मक कार्य करने की बात कही गई लेकिन छह माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी वहां पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि स्थिति इतनी दयनीय हो गई है कि शीतकाल में होने वाली बारिश का पूरा पानी जंगलों से बस्ती में आ रहा है। इससे भूमिगत पानी के कारण धीरे-धीरे भू-धंसाव होने के कारण कई बार पैदल मार्ग सहित घरों की दीवारें गिर रही है। वहीं गांव के ऊपर से आने वाले बरसाती पानी के कारण एक भवन को अधिक खतरा बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि गांव का मुख्य पेयजल स्रोत पूर्णत क्षतिग्रस्त है। गांव में आने वाली पाइपलाइन को भी ग्रामीणों ने ही किसी प्रकार आपसी सहयोग से ठीक किया और पैदल मार्ग भी दुरूस्त किया। वह पाइपलाइन भू-धंसाव के कारण कई बार क्षतिग्रस्त हो रही है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से जल्द ही गांव में आपदा के तहत सुरक्षात्मक कार्य करने की मांग की है।