सीमाओं पर चीन के साथ तनातनी के बीच उत्तरकाशी में सेना एवं आईटीबीपी के जवान भारत-चीन सीमा पर मुस्तैदी के साथ ड्यूटी दे रहे हैं। आईटीबीपी 12वीं वाहिनी के सेनानी का कहना है कि चीन ने घुसपैठ की कभी कोशिश नहीं की है। हिमवीर चौकियों पर मुस्तैदी से ड्यूटी दे रहे हैं।
जिले की करीब 117 किमी सीमा चीन से लगी हुई है। सीमांत भेड़ पालक संगठन के अध्यक्ष बगोरी गांव नारायण सिंह नेगी (74) का कहना है कि पहले वह लोग सीमावर्ती नेलांग और जाढ़ूंग गांव में रहते थे। भेड़ बकरियों के साथ वे कई सालों तक चीन सीमा तक गए हैं। इस हिस्से में हिमालय की दुर्गम परिस्थितियों के चलते चीन की ओर से भारत में घुसपैठ आसान नहीं है। हर्षिल निवासी डा. नागेंद्र सिंह रावत (74) ने बताया कि वर्तमान में चीन के साथ तनातनी के बीच बीते 21 मई को भारतीय सेना की मध्य कमान के सेनाध्यक्ष लै. जनरल इकरूप सिंह घुमन ने हर्षिल पहुंचकर सेना के अधिकारियों के साथ बैठक की। दो दिवसीय दौर में उन्होंने नेलांग बॉर्डर का जायजा भी लिया था। सीमावर्ती चौकियों पर तैनात आईटीबीपी 12वीं वाहिनी के सेनानी पवन कुमार ने बताया कि इस ओर से चीन ने कभी घुसपैठ की कोशिश नहीं की है। यहां आईटीबीपी के हिमवीर सीमावर्ती चौकियों पर मुस्तैदी के साथ ड्यूटी दे रहे हैं। इस हिस्से में अभी तक चीन की ओर से घुसपैठ या चीनी सेना से आमना सामना नहीं हुआ है। सीमाओं की चौकसी व्यवस्था पूरी तरह चाक चौबंद है।