कस्बों की गंदगी सीधे गंगा नदी में जा रही है। नदी किनारे कूड़े-करकट का ढेर लगा हुआ है। ऊपर से गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के दावे सिर्फ कागजों और बैठकों तक ही सीमित हो गए है।
गोमुख से लेेकर गंगा सागर तक गंगा स्वच्छता की मुहिम धरातल पर खरी नहीं उतर पा रही है। उत्तरकाशी में गंगा स्वच्छता के नाम पर स्थानीय प्रशासन एवं कई सामाजिक संगठन समय-समय बैठकें आयोजित कर चुके हैं।
लेकिन गंगा तटों पर गंदगी जस की तस पसरी है। स्थानीय लोगों एवं गंगा प्रेमियों से गंगा संरक्षण के लिए सुझाव मांगे जाने और स्कूली बच्चों एवं एनएसएस के स्वयं सेवियों के माध्यम से गंगा स्वच्छता के लिए जागरूकता अभियान चलाए गए।
लेकिन दिन-प्रतिदिन बदतर होती गंगा की स्थिति यही बयां कर रही है कि लोगों पर जागरूकता अभियानों से कोई असर नहीं हो रहा है।
उत्तरकाशी नगर के साथ ही जोशियाड़ा, ज्ञानसू, लदाड़ी, तिलोथ, मांडों सहित गंगा तट के गांवों एवं कस्बों की गंदगी सीधे नदी में जा रही है। गंगा तटों पर हर रोज भारी मात्रा में गंदगी नदी में उड़ेली जा रही है।
कई स्थानों पर गंगा के किनारे जैविक-अजैविक कूड़े के बड़े-बड़े ढेर भी लगे हुए हैं। गंगा तट पर स्थित होटल और धर्मशालाओं का सीवर भी सीधे गंगा में मिल रहा है। ऐसे में श्रद्धालुओं को ठेस पहुंच रही है।
उत्तरकाशी नगर व आसपास के कस्बों का कूड़ा-करकट गंगा तटों पर नहीं डालने दिया जायेगा। यदि कोई नदी तटों पर कूड़ा करकट डालता है तो उसके खिलाफ कार्यवाही की जायेगी। सीवर लाइन दुरुस्त करने के लिए भी संबंधित विभाग को निर्देशित किया गया है।
- हरगिरी, एसडीएम भटवाड़ी