गत स्थानीय निकाय चुनाव में नामांकन पत्र में तथ्य छुपाने के आरोपों से घिरे पालिकाध्यक्ष अतोल रावत को शासन ने राहत दी है। मामले की सघन जांच के बाद तथ्य छुपाने वाले मामले को शासन की ओर से समाप्त कर दिया गया है। इस आदेश के बाद बड़कोट थाने में अध्यक्ष के खिलाफ तथ्य छुपाने का दर्ज मामला भी वापस हो सकता है।
पालिकाध्यक्ष अतोल रावत ने मंगलवार को पत्रकार वार्ता में बताया कि उन पर जो आरोप चुनाव में लगाए गए थे वे सभी इस आदेश के बाद समाप्त हो गए हैं। 8 नवंबर 2016 को शहरी विकास सचिव डीएस गर्ब्याल के जारी एक आदेश में कहा गया है कि तथ्य छुपाने का मामला चुनाव संपन्न होने के तीस दिन के भीतर दायर करवाया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
इसलिए उप्र नगर पालिका अधिनियम की धारा 48 के तहत मामले को खारिज कर समाप्त कर दिया गया है। जिससे सितंबर में बड़कोट थाने में दर्ज मुकदमा भी वापस होने की संभावना है। पालिकाध्यक्ष रावत ने कहा कि वे जबरन बदनाम करने वाले विरोधियों पर सक्षम न्यायालय में मानहानि का मुकदमा दर्ज करेंगे। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों की जांच में भी उन्हें एसडीएम ने क्लीन चिट दी है।