भूमि हस्तांतरण एवं बजट स्वीकृति के बावजूद राजकीय महाविद्यालय के भवन का निर्माण नहीं हो रहा है। चिह्नित जमीन जल विद्युत निगम की ओर से खाली नहीं किए जाने से दिक्कत आ रही है। छात्र-छात्राओं ने शीघ्र जमीन खाली कराकर भवन निर्माण शुरू नहीं किए जाने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
वर्ष 2001 में राजकीय महाविद्यालय की स्थापना हुई, लेकिन अभी तक इसका भवन नहीं बना। बीते 15 सालों से महाविद्यालय जल विद्युत निगम कालोनी के कमरों में चल रहा है। बार-बार मांग करने पर अक्तूबर 2012 में शासन ने जल विद्युत निगम की 1.236 हेक्टेयर जमीन महाविद्यालय को हस्तांतरित कर यहां भवन निर्माण को स्वीकृति दी थी। यहां रूसा से बहुउद्देशीय भवन निर्माण के लिए बीते नवंबर में 24 लाख का बजट स्वीकृत हो चुका है और महाविद्यालय भवन निर्माण का पांच करोड़ का प्रस्ताव शासन स्तर पर गतिमान है।
प्रभारी प्राचार्य डा. वीएस पंवार ने बताया कि जमीन महाविद्यालय के नाम दर्ज हो चुकी है। इस पर बने भवनों को हटवाने के लिए जिला प्रशासन को पत्र लिखा गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। भवन निर्माण के लिए जमीन खाली कराना जरूरी है। महाविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष शिवानी गौड़, सचिव सोबेंद्र आदि का कहना है कि यदि शीघ्र जमीन खाली कराकर भवन निर्माण शुरू नहीं कराया गया, तो आंदोलन किया जाएगा।