गर्म कुंड गंगनानी का भूस्खलन गंगोत्री हाईवे पर नासूर ही नहीं बना है, बल्कि यहां के पौराणिक ऋषि पाराशर की तपस्थली, तप्त कुंड सहित हुर्री गांव और गंगनानी बस्ती के लिए भी खतरा बन गया है। भूस्खलन से हुर्री गांव में दस परिवारों की खेती की जमीन राजमा एवं रामदाना की फसल सहित धंस गई है।
पूर्व में वर्ष 2013 की आपदा में भागीरथी के कटाव से बढ़े भूस्खलन में जोलगांव तोक के आधा किमी क्षेत्र में अपनी खेती की जमीन गवांने वाले हुर्री गांव को अब नई मुसीबत ने घेर लिया है। दो किमी क्षेत्र में फैले जंगल के नीचे ढाल पर बसे गांव में खेतों में पानी के स्रोत फूटने से खेत धंसकर गंगोत्री हाईवे की ओर आ रहे हैं।
भूस्खलन में गांव का मुख्य संपर्क मार्ग भी धंस कर बहने लगा है। इसके नीचे ऋषि पाराशर मंदिर और दो तप्त कुंड सहित कई बहुमंजिले होटल, दुकानें एवं ढाबे भी खतरे की जद में आ गए हैं। यहां हाईवे के पास एक तीन मंजिला होटल के कुछ हिस्से क्षतिग्रस्त होने के साथ ही आसपास की जमीन पर दरारें पड़ने लगी हैं।
हुर्री गांव की प्रधान राखी रावत, पूर्व प्रधान बिहारी लाल, हुर्री निवासी विनोद रावत आदि का कहना है कि यदि गंगोत्री हाईवे पर यातायात बहाली के बाद भूस्खलन को नियंत्रित करने के लिए सड़क की ओर वैज्ञानिक ढंग से सीमेंट कंक्रीट की पक्की दीवाल बंदी नहीं की गई, तो न तो हाईवे सुरक्षित रहेगा और न ही गंगनानी और हुर्री गांव। अन्य विभागों को खतरे की जद में आई बस्ती के पीछे से भी सुरक्षा कार्य कराने की जरूरत है।