पर्वतारोहण प्रशिक्षण के लिए नेहरू पर्वतारोहण संस्थान जल्द ही हिमालय और उत्तराखंड के बारे में जानने के इच्छुक पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनने जा रहा है।
यहां अत्याधुनिक म्यूजियम का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें पर्यटक एक ही छत के नीचे समूचे हिमालय और उत्तराखंड की जीवन शैली और इससे जुड़ी दुर्लभ सामग्री का दीदार करने के साथ ही इनके बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां भी हासिल कर सकेंगे।
पहाड़ी वास्तु शिल्प के प्रयोग और इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ म्यूजियम (आईकॉम) के मानकों के अनुसार बनने वाला यह उत्तराखंड का पहला म्यूजियम होगा।
निम स्थित संग्रहालय में पर्वतारोहण के साथ ही पहाड़ के जनजीवन से जुड़ी विशेष सामग्रियों को सहेज कर रखा गया है। निम के प्रधानाचार्य कर्नल अजय कोठियाल की पहल पर म्यूजियम को और विस्तार देकर जानकारी परक एवं आकर्षण बनाने की तैयारी है।
करीब ढाई करोड़ रुपये लागत से बनने वाला म्यूजियम पहाड़ के वास्तु शिल्प से बनेगा।
दो मंजिला संग्रहालय की पहली मंजिल अत्याधुनिक तकनीकी से लैस होगी, जिसमें पर्यटक क्रिया-प्रतिक्रिया के माध्यम से जानकारी हासिल करेंगे।
यहां हिमालय एवं उत्तराखंड के साथ ही पर्वतारोहण एवं अन्य साहसिक खेलों के बारे में जानकारी मिलेगी। दूसरी मंजिल में उत्तराखंड की कला, संस्कृति एवं मानव विज्ञान से जुड़ी दुर्लभ वस्तुओं का संग्रह देखने को मिलेगा। म्यूजियम का निर्माण आईकॉम के मानकों के अनुसार कराया जा रहा है।
यह म्यूजियम पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित होगा।
कोट...
म्यूजियम में पहाड़ की जीवन शैली और इससे जुड़ी सामग्री का जीवंत प्रदर्शन किया जाएगा। विजिटर्स फ्रेंडली म्यूजियम के संचालन में प्राकृतिक ऊर्जा का उपयोग किया जाएगा। म्यूजियम के लिए दुर्लभ वस्तुओं का संग्रह किया जा रहा है। इसके निर्माण में विशेषज्ञों का सहयोग लिया जा रहा है। मार्च 2017 से पूर्व इसे तैयार करने का लक्ष्य है।
विशाल रंजन, क्यूरेट नेहरू पर्वतारोहण संस्थान उत्तरकाशी।