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कपाट बंदी के बाद गंगोत्री धाम की सुरक्षा भगवान भरोसे

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कपाट बंदी के बाद गंगोत्री धाम में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं। गंगोत्री व्यापार मंडल के पूर्व अध्यक्ष का कहना है कि कपाट बंद होने के बाद कितने लोग धाम में रह रहे हैं। प्रशासन व मंदिर समिति के पास इसका कोई रिकार्ड नहीं है, जिससे सुरक्षा भगवान भरोसे है। वहीं पुलिस ने भी कपाट बंदी के बाद कितने लोग धाम में रह रहते हैं, इसका कोई रिकार्ड न होने की बात स्वीकारी है।
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गंगोत्री व्यापार मंडल के पूर्व अध्यक्ष तीर्थ पुरोहित सत्येंद्र सेमवाल ने जिला और पुलिस प्रशासन से शीतकाल में धाम में निवास करने वाले सभी लोगों का बद्रीनाथ धाम की तर्ज ब्योरा रखने की मांग की है। गंगोत्री धाम से लगे ट्रेक रूट बंद होने व धाम में कपाट बंद होने के बाद भी कुछ साधु संन्यासी तप साधना के नाम पर धाम में ही निवास करते हैं, लेकिन कितने लोग यहां रहते हैं और कब तक रहते हैं इसका रिकॉर्ड पुलिस के पास नहीं है। सतेंद्र सेंमवाल ने कहा कि इस संबंध में उच्चाधिकारियों से भी वार्ता की जाएगी। वहीं मंदिर समिति के अध्यक्ष हरीश सेमवाल ने कहा कि मंदिर समिति के कुछ सदस्य व कुछ साधु संत वहां रहते हैं। एसपी मणिकांत मिश्रा ने बताया कि कपाट बंदी के बाद गंगोत्री धाम में कितने लोग रहते हैं। इसका कोई रिकार्ड पुलिस के पास नहीं होता है।
तृतीय केदार तुंगनाथ में पहुंच रहे अराजक तत्व
ऊखीमठ। तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट बंद होने के बाद भी मंदिर क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही निरंतर बनी हुई है, जिससे वहां की धार्मिक परंपराएं प्रभावित हो रही है। साथ ही मंदिर की सुरक्षा को भी खतरा बना हुआ है। मठाधिपति, हक-हकूकधारियों व जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन व वन विभाग ने तुंगनाथ क्षेत्र व मंदिर में पर्यटकों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
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मंदिर के मठाधिपति व मक्कूमठ गांव निवासी राम प्रसाद मैठाणी का कहना है कि 85 गूठ गांवों के आस्था के केंद्र तुंगनाथ मंदिर को पर्यटन के नाम पर पहुंच रहे अराजक तत्वों के द्वारा धार्मिक परंपराओं को तोड़ने का काम किया जा रहा है। इस कृत्य से श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंच रही है। ग्राम प्रधान विजयपाल सिंह नेगी का कहना है कि वन विभाग और प्रशासन को इस संबंध में पत्र भेजा गया है, लेकिन अभी तक कार्रवाई तो दूर जवाब भी नहीं मिल पाया है। कहा कि मामले में अगर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन के साथ कोर्ट की शरण में जाने को बाध्य होंगे।
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