नौगांव, मुराड़ी, मुंगरा एवं धारी गांव के ग्रामीणों की नौगांव नगर पंचायत बनने की खुशी एक साल में ही धराशाई हो गई। ग्रामीणों ने विकास के सपने बुने थे, लेकिन मूलभूत सुविधाओं की स्थिति भी बद से बदतर हो गई है।
ग्राम विकास विभाग ने नगर पंचायत बनते ही इसमें शामिल गांवों के विकास के लिए दिए जाने वाले बजट पर रोक लगा दी और शहरी विकास विभाग अभी तक नगर पंचायत का ढांचा ही तैयार नहीं कर पाया है।
सरकार ने एक साल पहले नौगांव, मुराड़ी, मुंगरा और धारी गांव को मिलाकर नौगांव नगर पंचायत का गठन किया था। नगर पंचायत अस्तित्व में आते ही गांवों के पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकार भी समाप्त हो गए। चुनाव जीते उन्हें महज छह माह ही हुए थे।
साथ ही ग्राम विकास विभाग ने इन गांवों के लिए राज्य वित्त, 13वां एवं 14वां वित्त और मनरेगा आदि मदों में दिए जाने वाले बजट पर भी रोक लगा दी। नगर पंचायत के नाम पर कार्यालय खोलकर संविदा पर एक महिला कर्मी तैनात की गई है।
नगर पंचायत की समस्याओं को लेकर अभी तक सिर्फ एक बैठक हुई और पूरे साल में 40 लाख रुपये लागत से छिटपुट कार्य कराए गए। डा. विरेंद्र चंद, व्यापार मंडल अध्यक्ष शशिमोहन राणा का कहना है कि जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हैं। सार्वजनिक शौचालय नहीं हैं। हैंडपंप, स्ट्रीट लाइट बंद पड़ी हैं।
कोट.........
नगर पंचायत की समस्याओं के समाधान के लिए जल्द ही क्षेत्र के लोगों के साथ बैठक की जाएगी। साथ ही आगे भी नियमित बैठकों का रोस्टर तैयार किया जाएगा।
राजकुमार पांडेय, एसडीएम बड़कोट।