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मायके से ही मैली हो रही गंगा

Sat, 03 Dec 2016 09:32 PM IST
ब्यूरो/ अमर उझाला, उत्तरकाशी
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उत्तरकाशी में भागीरथी नदी पर कुछ इस तरह डाला जा रहा कूड़ा। - फोटो : amar ujala.
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गंगा के संरक्षण के लिए सरकार सहित देशभर में तमाम संस्थाएं काम करने का दावा कर रही हैं, लेकिन धरातल में कुछ नजर नहीं आ रहा है। गंगोत्री से लेकर चिन्यालीसौड़ तक आज भी सीवर ट्रीटमेंट और कूड़ा निस्तारण के लिए डंपिंग जोन की व्यवस्था नहीं की गई है। यही स्थिति अलकनंदा की भी है। बदरीनाथ धाम में भी सीवरेज की व्यवस्था नहीं होने से गंदगी सीधे अलकनंदा में उड़ेली जा रही है, जबकि पूर्व में नैनीताल हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को बदरीनाथ में सीवरेज की व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके अलकनंदा की स्वच्छता भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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उत्तरकाशी। राष्ट्रीय गंगा सफाई मिशन में राज्य की सहमति के बिना भारत सरकार की ओर से नियुक्त एजेंसी वेपकॉस को जिम्मेदारी देकर राज्य की कार्यदायी संस्थाओं को किनारा करने से हितों का टकराव सामने आ रहा है। गंगोत्री से लेकर भटवाड़ी, जिला मुख्यालय, डुंडा व चिन्यालीसौड़ में कहीं भी पालिथीन व कचरे के निस्तारण की व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की भी कहीं व्यवस्था नहीं है।
गंगोत्री में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट को तैयार होने में विभागीय अधिकारी अभी पांच माह और लगने की बात कर रहे हैं, जबकि इस 2010 में शुरू हुए कार्य को नवंबर 2014 में पूर्ण होना था। ऐसे में वर्षों से चल रहे सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का काम अधूूरा पड़ा है। नगर क्षेत्र के ज्ञानसू में वर्ष 2012 की आपदा के बाद से ही सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बंद पड़ा है।
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दूसरी ओर गंगोत्री से लेकर चिन्यालीसौड़ तक कूड़ा निस्तारण की भी कोई व्यवस्थाएं नहीं है। डंपिंग जोन की व्यवस्था नहीं होने से ग्रामीण से लेकर शहरी इलाकों में लगे गंदगी के ढेर सीधे नदी में बह रहे। इतना ही नहीं गंगा संरक्षण के नाम पर पालिथीन को प्रतिबंधित करने के एनजीटी के निर्देशों का भी खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। गंगा नदी के किनारे दो सौ मीटर दायरे के अंतर्गत भवनों के निर्माण पर भी कोई ध्यान नहीं दे रहा है। हालांकि अब हाईकोर्ट ने गंगा के संरक्षण के लिए केंद्र सरकार को एक विशेष कानून बनाने के साथ ही गंगा के उद्गम से गंगा सागर तक के पांच राज्यों के लिए तीन माह में अंतरराज्यीय परिषद का गठन करने को कहा। ऐसे में अब गंगा संरक्षण को लेकर श्रद्धालुओं में आस जगी है।
     
गंगोत्री सीवर ट्रीटमेंट प्लांट निर्माणाधीन है। कुछ माह में बनकर तैयार हो जाएगा। निर्माण में देरी की वजह गंगोत्री में साल के छह माह बर्फबारी का होना है, जिससे काम करना मुश्किल हो जाता है।
-सुरेश पाल, अधिशासी अभियंता, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई


गंगा किनारे होता है शौच से लेकर स्नान
श्रीनगर। कौड़ियाल, देवप्रयाग, कीर्तिनगर, श्रीनगर और श्रीकोट गंगा और गंगा की सहायक नदियों के किनारे बसे हैं। कौड़ियाला से ऋषिकेश के बीच कई रीवर राफ्टिंग कैंप हैं। वीकेंड पर यहां पर्यटक पहुंचते हैं, लेकिन इन कैंपों की साफ-सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। देवप्रयाग का अधिकांश हिस्सा अलकनंदा व भागीरथी नदी के ऊपर और बदरीनाथ हाईवे के मध्य बसा है। यहां घरों से निकलने वाला गंदा पानी सीधे नदी में गिर रहा है।

वहीं श्रीनगर और श्रीकोट में हजारों की संख्या में मजदूर, बंजारे और कच्चे घरों मेें रहने वाले लोग नदी किनारे शौच जाते हैं। स्थिति यह है कि कई भवन स्वामियों ने मजदूरों को कमरे किराए पर दिए हैं, लेकिन शौचालय और स्नानागार की व्यवस्था नहीं की है। जिससे इनका शौच से लेकर नहाने-धोने का काम नदी में होता है। वहीं, एनजीटी के प्रतिबंध के बावजूद पहाड़ में पालिथीन का प्रयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है। निजी और सरकारी अस्पतालों का गंदा पानी गंगा में जा रहा है।

बदरीनाथ में नहीं सीवरेज व्यवस्था
गोपेश्वर। बदरीनाथ धाम में सीवरेज की व्यवस्था नहीं होने से गंदगी सीधे अलकनंदा में उड़ेली जा रही है, जबकि पूर्व में नैनीताल हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को बदरीनाथ में सीवरेज की व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे। यही स्थिति जोशीमठ और पीपलकोटी की भी है। दोनों जगहों पर जल विद्युत परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। परियोजना निर्मात्री कंपनियों की कालोनियों में भी सीवरेज की व्यवस्था नहीं है।

बदरीनाथ हाईवे पर नंदप्रयाग, कर्णप्रयाग, चमोली, पीपलकोटी में लॉज और होटल की गंदगी भी सीधे अलकनंदा में उड़ेली जा रही है। चमोली बाजार में पिछले तीन साल से सीवरेज लाइन क्षतिग्रस्त पड़ी है। नंदप्रयाग क्षेत्र में भी होटल और लॉज की गंदगी नंदाकिनी में डाली जा रही है। वहीं, अलकनंदा, नंदाकिनी और पिंडर नदी के किनारे संचालित हो रहे स्टोन क्रेशर की गंदगी से भी नदी दूषित हो रही है।

पालिका नियमों को दिखा रही ठेंगा
रुद्रप्रयाग। पालिका रुद्रप्रयाग, नगर से प्रतिदिन निकलने वाले आठ टन से अधिक कूड़े को अलकनंदा नदी में उडे़ल रही है। शासन-प्रशासन के निर्देशों के बाद भी पालिका की ओर से कूड़ा निस्तारण के लिए कोई प्रबंध नहीं किया गया है। रुद्रप्रयाग में प्रतिदिन पालिका द्वारा जैविक व अजैविक कूड़े को एकत्रित किया जा रहा है। निस्तारण के इंतजाम नहीं होने के कारण कूड़े को पांच किमी दूर रैंतोली में राजमार्ग से नीचे अलकनंदा नदी में उडे़ला जा रहा है। इधर, मुख्य बाजार में भी कई लॉज व होटल द्वारा गंदगी नदी में डाली जा रही है। अगस्त्यमुनि में भी कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था नहीं है।
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