गंगोत्री में भागीरथी में ऊपर से आ रहा मलबा और सहायक नदियों से हो रहा कटाव तबाही को न्योता दे रहा है, तो यमुनोत्री में यमुना से हो रहा कटाव और कालिंदी भूस्खलन मंदिर के लिए खतरा बना हुआ है।
गंगोत्री में केदारगंगा एवं रुद्रगैरा नदी से हो रहा कटाव और भैरोंझाप नाला तबाही का सबब बन सकता है। केदारगंगा से हो रहे कटाव से तटबंध एवं पैदल रास्ते क्षतिग्रस्त हो रखे हैं।
सूर्यकुंड पर भी कटाव का असर दिख रहा है। यहां गोमुख की ओर भागीरथी में भारी मलबा कभी भी नदी के प्रवाह को अनियंत्रित कर तबाही मचा सकता है। इसी तरह यमुनोत्री में तेज ढाल वाली यमुना से हो रहा कटाव मंदिर के लिए खतरा बना हुआ है।
मंदिर के सिरहाने 90 डिग्री पर खड़े कालिंदी पर्वत से हुआ भूस्खलन पूर्व में भी मंदिर को क्षति पहुंचाने के साथ ही जानलेवा साबित हुआ है।
गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष भागेश्वर प्रसाद सेमवाल, सचिव सुरेश सेमवाल, यमुनोत्री मंदिर समिति के उपाध्यक्ष पवन प्रकाश उनियाल, सचिव पुरुषोत्तम उनियाल का कहना है कि सरकार को यात्रा मार्ग दुरुस्त कराने के साथ ही इन धामों की सुरक्षा के लिए ठोस इंतजाम करने चाहिए।
चार धाम यात्रा पर पड़ रहे असर का अध्ययन कर लौटे पर्यावरणविद् चंडी प्रसाद भट्ट का कहना है कि इस साल यात्रा मार्ग दुरुस्त होने के कारण ही यात्रा अच्छी चल रही है।
यात्रा मार्ग के साथ ही तीर्थधामों को भी सुरक्षित किया जाना चाहिए। यमुना एवं भागीरथी समेत इसकी सहायक नदियों की बौखलाहट को नियंत्रित करके धामों की सुरक्षा का मजबूत घेरा तैयार करना जरूरी है।