हल्की बारिश में भी भंकोली, ढासड़ा के आसपास 16 वर्ग किमी क्षेत्र के घने जंगल की जमीन धंसकर पेड़ों सहित असी गंगा की ओर बढ़ रहे हैं। एनजीटी की बंदिश के कारण मलबे से सटी असी गंगा का चैनलाइज का काम नहीं हो पाया। इस यदि भारी बारिश हुई, तो असी गंगा के मलबे से घाटी के सात गांवों को काफी नुकसान हो सकता है।
सिल्याना में जंगल धंस रहा है। भंकोली गांव के ऊपर पंजाई में हर बारिश में बड़ा जल स्रोत फूटने से गांव से संगमचट्टी तक 12 किमी क्षेत्र जंगल सहित धंस रहा है। घिया गाड के जलागम क्षेत्र के जंगल तथा पहाड़ी में भूस्खलन सक्रीय है।
अगस्त 2012 की आपदा में घाटी में 16 पुल पुलिया बही तथा 18 मेगावाट की तीन निर्माणाधीन जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हुई। साथ ही 32 से अधिक जानें गई थी। इधर, आपदा के बाद तिलोथ से ऊपर भागीरथी तथा अस्सी गंगा में रिटेनिंग वाल नदियों के मलबे से पटी है, जो लोगों की परेशानी का सबब बन सकती है।
भंकोली के सुरेंद्र सिंह, नौगांव के नागेंद्र सिंह ढासड़ा का कहना है कि भूधंसाव को देखते हुए सरकार को क्षेत्र में कृषि वानिकी को प्रोत्साहित करना चाहिए। पूर्व मुख्य अभियंता एएस कनेरी का कहना है कि असी गंगा के ऊपर वाले क्षेत्र में भूमिगत तथा सतही जल स्रोत का प्रवाह गड़बड़ाने से धंसाव की गति बढ़ रही है।
नदी को चैनलाइज करने में एनजीटी की बंदिशें आड़े आ रही हैं। पहले असी गंगा घाटी के चार गांवों को विस्थापन की सूची में रखा गया था, लेकिन नई गाइड लाइन के अनुसार हुई जांच में इन्हें सूची से बाहर कर दिया गया है।
-देवेंद्र पटवाल, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, उत्तरकाशी।