एक ओर जहां स्थानीय किसान जंगली सुअर एवं बंदरों की दहशत और मौसम की बेरुखी के चलते खेती बागवानी से विमुख हो रहे हैं, वहीं डुंडा ब्लाक के अस्तल गांव में नेपाली मूल का राम सिंह किराए पर लिए खेतों को आबाद कर स्थानीय किसानों को आईना दिखा रहा है। आजकल राम सिंह के खेतों में खूब टमाटर, शिमला मिर्च, बैंगन आदि सब्जियाें की भरमार है।
पहाड़ के ग्रामीण इलाकों में जंगली सूअरों एवं बंदरों की ओर से फसलों को नुकसान पहुंचाने की खबरें आम हो चुकी हैं। इसके चलते बड़ी संख्या में किसान खेतीबाड़ी से विमुख होते जा रहे हैं। इस दौर में नेपाली मूल के राम सिंह ने तीन माह पहले डुंडा ब्लाक के अस्तल गांव में एक किसान के बंजर पड़ते जा रहे करीब तीस नाली खेत महज बीस हजार रुपये सालाना किराए पर लिए और इसमें सब्जी उत्पादन शुरू किया।
राम सिंह की मेहनत अब रंग लाने लगी है। आजकल इन खेतों में टमाटर की फसल लहलहा रही है। शिमला मिर्च, बैंगन, भिंडी आदि की फसल भी तैयार होने को है। राम सिंह रोजाना करीब 50 किलो टमाटर आसानी से बाजार भाव से कम पर बेचकर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।
बता दें कि अस्तल एवं रनाड़ी गांव के लिए लिफ्ट सिंचाई योजना बनी होने से यहां सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध है। राम सिंह भले ही बिना सरकारी सपोर्ट के खेतों से सोना उगा रहा है, लेकिन कृषि एवं उद्यान आदि विभागों में खेतीबाड़ी को बढ़ावा देने की सब्सिडी वाली कई योजनाएं मौजूद हैं।
राम सिंह का कहना है कि अस्तल में सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता ने उसका काम आसान कर दिया। अच्छे बीज और सब्जियों पर छिड़काव के लिए दवाएं उपलब्ध हो जाए, तो खेत सोना उगलेंगे। ज्यादा संख्या में किसान समूह बनाकर सब्जी उत्पादन करें, तो इससे किसानों को ज्यादा फायदा मिलेगा।