जिले में शुक्रवार को हुई बारिश-बर्फबारी खेती-बागवानी और पर्यटन के लिए संजीवनी मानी जा रही है।
इससे जमीन को नमी मिलने से सूखे की चपेट में आई फसलें कुछ हद तक बचने की उम्मीद है।
हालांकि सेब की चिलिंग रिक्वायरमेंट पूरी करने के लिए अभी और बर्फबारी की जरूरत है।
दयारा आदि पर्यटक स्थल बर्फ से लकदक होने से यहां देश-विदेश से पर्यटकों के पहुंचने की उम्मीद है।
इन सर्दियों में अभी तक अपेक्षित बारिश और बर्फबारी न होने से खेतों में गेहूं, मटर आदि की फसल सूखने लगी थी। सेब के पेड़ों की न्यूनतम अवशीतन आवश्यकता पूरी न होने से सेब किसानों के चेहरे भी मुरझाए हुए थे लेकिन शुक्रवार को हुई बारिश-बर्फबारी से किसानों के चेहरे खिल गए। खरसाली निवासी रणवीर राणा ने बताया कि बारिश और बर्फबारी से खेतों को नमी मिल गई है। तीर्थ पुरोहित प्रवेश उनियाल ने बताया कि अब खरसाली एवं मुखबा तक आने वाले श्रद्धालु यहां हिमाच्छादित वादियों का नजारा भी कर सकेंगे।
हर्षिल निवासी डा. नागेंद्र रावत ने कहा कि सही मायने में यह इस सीजन की पहली बर्फबारी है।
दोपहर बाद हुई बारिश से बर्फ काफी पिघल चुकी है, अभी और बर्फबारी की जरूरत है।
सुक्की निवासी मोहन सिंह ने बताया कि बारिश बर्फबारी से खेतों को नमी मिलने से अब आलू की बुआई में आसानी होगी।
कोट.......
अभी तक अपेक्षित बारिश एवं बर्फबारी न होने से जमीन से नमी गायब थी। मौसम में आया यह बदलाव इस समय खेतों में लगी गेहूं, मटर, सरसों आदि फसलों के लिए फायदेमंद है। - डा. वीके सचान, प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र चिन्यालीसौड़।
इस बार अभी तक अपेक्षित बर्फबारी न होने से दयारा में स्कीइंग प्रशिक्षण के लिए समस्या खड़ी हो गई थी। शुक्रवार को हुई बर्फबारी से दयारा में दो फिट तक बर्फ की चादर बिछ गई है।
अगले कुछ दिनों में फिर बर्फबारी हुई तो फरवरी माह में यहां स्कीइंग प्रशिक्षण कैंप लगाया जाएगा। - केएस नेगी, पर्यटन अधिकारी उत्तरकाशी।