सर्दी में सूखे जैसे हालात पैदा होने से काश्तकार परेशान हैं। लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण गेहूं, मटर आदि रबी की फसलें चौपट होने की कगार पर है। जिले की यमुना व गंगा घाटी में ज्यादातर काश्तकारों ने बारिश नहीं होने की वजह से अभी तक फसलों की बुवाई ही नहीं की है। एक अनुमान के अनुसार सूखे से जिलेभर में सरसों व मसूर की फसल 25 से 30 फीसदी तक प्रभावित हुई है।
रवाईं घाटी के काश्तकार करीब 60 प्रतिशत असिंचित भूमि पर खेती करते हैं, लेकिन इस बार सूखे जैसे हालात पैदा होने से काश्तकार फसल की बुवाई नहीं कर पाए। सूखे की स्थिति के कारण जिलेभर में लगभग 900 हेक्टेयर भूमि पर बुवाई नहीं होने से खाली पड़ी है।
स्थिति यह है कि खेतों को पानी नहीं मिलने से सख्त हुई असिंचित भूमि पर किसान हल नहीं चला पा रहा। रवाईं घाटी फल एवं सब्जी उत्पादक एसोसिएशन के अध्यक्ष जगमोहन सिंह चंद, काश्तकार प्रेम सिंह राणा, विशालमणि डिमरी, अजब सिंह रावत आदि का कहना है कि बारिश नहीं होने से सूखे के कारण सख्त हुई भूमि पर हल चलाना बेहद कठिन है।
कहते हैं कि अब बारिश होगी भी तो क्या फायदा, बुवाई का समय तो निकल चुका है। हालांकि कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एक सप्ताह के भीतर यदि बारिश होती है, तो फसलों की बुवाई की जा सकती है।
बारिश नहीं होने के कारण जिलेभर में 25 फीसदी तक सरसों व मसूर की फसल प्रभावित हुई है, जबकि लगभग 900 हेक्टेयर भूमि बुवाई नहीं होने से खाली पड़ी है। 5-7 दिन में बारिश हुई, तो खेतों में बुवाई की जा सकती है।
-महिधर तोमर, मुख्य कृषि अधिकारी।