मुख्यमंत्री के आदेश के बावजूद यमुनोत्री हाईवे से लगे पालीगाड़ के आपदा पीड़ितों को अनुमन्य राहत सहायता नहीं मिलने पर आपदा पीड़ितों में रोष है। आपदा पीड़ित सहायता के लिए दर-दर भटक चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
26 जुलाई 2016 को भारी बरसात के कारण पालीगाड़ के उफान में चार भवनों के साथ ही हाइवे का काफी हिस्सा बह गया था। लोगों ने किसी तरह स्वयं की जान बचाई, जबकि शेष सारा सामान बह गया लेकिन आज तक राहत सहायता नहीं मिलने पर आपदा पीड़ितों में शासन-प्रशासन के प्रति नाराजगी बनी है।
आपदा प्रभावित हरदेव सिंह, विजय सिंह, पूर्ण सिंह, चतर सिंह, प्रवीन सिंह आदि का कहना है कि वे देहरादून स्थित मुख्यमंत्री आवास पर सीएम से इस संबंध में मिल चुके हैं, लेकिन आश्वासन के बावजूद राहत सहायता नहीं दी गई। आपदा को आए तीन माह से अधिक का समय हो गया, लेकिन राहत के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। इधर, तहसीलदार एसएस चौहान का कहना है कि पालीगाड़ में बहे भवन सरकारी भूमि पर काबिज थे, जिन्हें सरकारी मदद नहीं दी जा सकती है। शासनादेश जारी होने के बाद सहायता मिलना संभव है। साफ है कि एक तरफ तो मुख्यमंत्री ने आपदा प्रभावितों को सहायता दिलाने की बात कही और दूसरी ओर अभी तक इसका शासनादेश जारी नहीं किया गया।
पत्रावली तैयार थी, पर नहीं दी सहायता
पालीगाड़ के आपदा पीड़ितों की पत्रावली तैयार भी की गई थी। इस बीच राजस्व विभाग को शिकायत मिली कि उनका भवन सरकारी भूमि पर अवैध रूप से बने थे। राजस्व विभाग हरकत में आया और पत्रावली उलट कर अवैध कब्जाधारियों को सरकारी मदद नहीं देने का मन बनाया, जबकि खरादी में वर्ष 2013 की आपदा में अधिकांश अवैध कब्जाधारियों को एक नहीं दो-दो बार सहायता दी गई थी।