ग्रामीण लंबे समय से कर रहे हैं जोखिमभरी आवाजाही
नौगांव (उत्तरकाशी)। छमरोटा गांव के लिए 2009 में बनी छह किमी सड़क का डेढ़ दशक बाद भी डामरीकरण नहीं हो पाया है। लोनिवि बड़कोट ने सड़क तो बना दी, लेकिन उसका डामरीकरण करना भूल गया। मोटर मार्ग का डामरीकरण न होने से छमरोटा गांव के ग्रामीण लंबे समय से जोखिम भरी आवाजाही कर रहे हैं।
छमरोटा मोटर मार्ग को वर्ष 2024 में पीएमजीएसवाई को हस्तांतरण हो गया था जिससे लोगों को डामरीकरण होने की उम्मीद जगी थी लेकिन मोटर मार्ग का डामरीकरण न होने से ग्रामीणों को बरसात की चिंता सताने लगी है। छमरोटा के पूर्व प्रधान राम प्रसाद सेमवाल का कहना है कि बारिश में मोटर मार्ग पर चलना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों की आजीविका टमाटर, फ्रेंचबीन और आलू आदि नकदी फसलों पर टिकी है।
बारिश के समय सड़क पर लोडर वाहनों की सुरक्षित आवाजाही की वजह से ग्रामीण नकदी फसलों को सही समय पर मंडी नहीं पहुंचा पाते हैं। साथ ही फसलों के खराब होने का डर रहता है। वहीं, पुरोला पीएमजीएसवाई के अधिशासी अभियंता योगेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि निविदा प्रक्रिया गतिमान है। निविदा का तकनीकी पार्ट खुल गया है। वित्त खुलना शेष है। निविदा की सभी प्रक्रियाएं इस माह पूरी हो जाएगी।