जापानी तकनीक पर उठ रहे सवाल, भू-क्षरण से हाईवे को खतरा
मल्ला में जायका के तहत पहाड़ी पर हो रहा है मरम्मतीकरण कार्य
उत्तरकाशी। गंगोत्री हाईवे पर मल्ला के समीप जापान अंतर राष्ट्रीय को-ऑपरेशन एजेंसी (जायका) के तहत पहाड़ी व नाले पर हो रहे वन संसाधन प्रबंधन परियोजना का मरम्मतीकरण का कार्य निर्माण पूरा होने से पहले ही टूटने लगा है। पहाड़ी के शीर्ष से हाईवे तक जगह-जगह भू-क्षरण होने के कारण क्षतिग्रस्त हो रहा है। इससे कार्यदायी संस्था की जापानी तकनीक पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब डेढ़ वर्ष से यह कार्य पूरा नहीं हो पाया है।
टकनौर क्षेत्र में मल्ला के समीप नाले और उसके आसपास होने वाले भूस्खलन जोन के मरम्मतीकरण के लिए जायका के तहत गत डेढ़ वर्ष से जापानी तकनीक से कार्य किया जा रहा है लेकिन यह कार्य अभी तक पूरा नहींं हो पाया है। अब स्थिति यह है कि वहां पर भूस्खलन को रोकने के लिए चेकडैम आदि बनाए गए थे। उन पर भू-क्षरण होने के कारण यह क्षतिग्रस्त हो रहे हैं।
पहाड़ी के शीर्ष पर बरसात में लगातार इस पर भू-क्षरण का खतरा बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हालांकि अभी इसका मलबा वहां पर लोहे की बाड़ लगाने के कारण सड़क पर नहीं पहुंचा है लेकिन अगर इसी प्रकार वहां पर भू-क्षरण जारी रहता है तो जल्द ही यह गंगोत्री हाईवे के लिए दोबारा खतरा बन जाएगा।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इसकी निगरानी राज्य स्तर से की जा रही है। डीएम प्रशांत आर्य का कहना है कि इस संबंध में जानकारी लेकर इसको जल्द ही दिखवाया जाएगा।