राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) की ओर से गठित अनुश्रवण समिति ने गंगोत्री धाम में गंगा भागीरथी के तल पर जमा हो रहे मलबे पर चिंता जाहिर की है। दो दिवसीय निरीक्षण पर पहुंची समिति ने जल्द खनन विभाग व अन्य विशेषज्ञों की टीम भेजकर गंगोत्री धाम क्षेत्र का सर्वे कराने की बात कही है। समिति के सदस्यों ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट व सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की स्थिति का भी जायजा लिया।
हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस यूसी ध्यानी के नेतृत्व वाली अनुश्रवण समिति की टीम शनिवार को दो दिवसीय सर्वे के लिए उत्तरकाशी पहुंची थी। टीम के सदस्यों ने शनिवार को ज्ञानसू क्षेत्र स्थित एसटीपी का निरीक्षण किया था, जबकि रविवार को टीम ने गंगोत्री धाम पहुंचकर एसटीपी प्लांट, स्नान घाटों व कूड़ा निस्तारण व्यवस्था का जायजा लिया। इस दौरान प्रशासन ने बताया कि गंगोत्री धाम में मौजूद एसटीपी का विस्तार करने के लिए गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने नया प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा है। वहीं ज्ञानसू स्थित एसटीपी के विस्तार के लिए भी करीब 60 करोड़ का प्रस्ताव तैयार किया गया है। ताकि जिला मुख्यालय क्षेत्र की जरूरत के अनुसार 30 किमी की अतिरिक्त सीवर लाइन बिछाई जा सके।
एसडीएम भटवाड़ी देवेंद्र नेगी ने बताया कि टीम ने नदी तल पर जमा हो रहे मलबे पर चिंता जताई है। अधिकारियों ने जल्द ही विशेषज्ञों से क्षेत्र का सर्वे कराकर अतिरिक्त मलबे को हटाने के लिए जरूरी कदम उठाने का भरोसा दिया है। इसके अतिरिक्त अधिकारियों ने गंगोत्री धाम स्थित स्नान घाटों का नमामि गंगे परियोजना के तहत पुनर्निर्माण कराने की बात भी कही है। अनुश्रवण समिति के अध्यक्ष यूसी ध्यानी ने कहा कि भागीरथी से 100 मीटर की दूरी पर निर्माण कराने को लेकर भी प्रशासन से एनजीटी के नियमों के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इस मौके पर प्रोफेसर एके काजमी, तकनीकी विशेषज्ञ डॉ. रघुवंशी आदि मौजूद थे।